Sharad Pawar Ajit Pawar NCP Merger News (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
NCP Party Merger: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक और दुखद निधन के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अजित दादा के जाने के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, लेकिन चर्चा अब उनके राजनीतिक उत्तराधिकार से आगे बढ़कर पूरी पार्टी के भविष्य पर टिक गई है। राजनीतिक गलियारों में यह खबर जोरों पर है कि शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले दोनों गुट अब फिर से एक होने जा रहे हैं। खुद शरद पवार ने भी इस एकीकरण की प्रक्रिया को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है।
शरद पवार ने हाल ही में साझा किया कि पिछले चार महीनों से दोनों गुटों को एक साथ लाने के लिए सकारात्मक चर्चा चल रही थी। उन्होंने बताया कि इस बातचीत का नेतृत्व स्वयं अजित पवार और जयंत पाटिल कर रहे थे। विलीनीकरण की आधिकारिक घोषणा 12 तारीख को होनी तय थी, लेकिन अजित पवार की अचानक मृत्यु ने इस प्रक्रिया में बाधा डाल दी। शरद पवार के अनुसार, अजित दादा की प्रबल इच्छा थी कि पार्टी के दोनों गुट फिर से एकजुट होकर काम करें।
विद्या प्रतिष्ठान के ट्रस्टी और दिवंगत अजित पवार के बेहद करीबी माने जाने वाले किरण गुजर ने इस मामले में एक सनसनीखेज दावा किया है। गुजर ने बताया कि 21 जनवरी को अजित पवार ने उनसे निजी तौर पर कहा था कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का विलीनीकरण अब अनिवार्य हो गया है और इसके लिए बातचीत अंतिम दौर में है। गुजर के अनुसार, अगले 10 से 11 दिनों तक पवार परिवार शोक के कारण इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहेगा, लेकिन उसके तुरंत बाद विलीनीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
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बारामती स्थित शरद पवार के आवास ‘गोविंदबाग’ में रविवार को एक महत्वपूर्ण पारिवारिक और राजनीतिक बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में शरद पवार के साथ सांसद सुप्रिया सुले, विधायक रोहित पवार, पार्थ पवार और युगेंद्र पवार जैसे परिवार के प्रमुख सदस्य शामिल थे। हालांकि बैठक के बाद किसी भी सदस्य ने मीडिया से खुलकर बात नहीं की, लेकिन सूत्रों का कहना है कि अजित पवार की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पार्टी को एक करने पर आम सहमति बन गई है। रोहित और पार्थ पवार की एक साथ मौजूदगी ने इस दावे को और पुख्ता किया है।
यदि अगले कुछ दिनों में दोनों NCP गुटों का विलय हो जाता है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा घटनाक्रम होगा। अजित पवार के निधन के बाद उनके गुट के कई विधायक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, ऐसे में शरद पवार के नेतृत्व में वापस जाना उनके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प हो सकता है। विलीनीकरण से न केवल पवार परिवार की शक्ति फिर से संगठित होगी, बल्कि आगामी चुनावों में विपक्षी गठबंधन (महाविकास अघाड़ी) को भी एक नई संजीवनी मिल सकती है।