नासिक में बिना OC इस्तेमाल हो रहीं 46,389 संपत्तियां, विधानसभा में मंत्री का खुलासा- वसूला जाएगा भारी जुर्माना

Nashik Property News: नासिक में बिना भोगवटा प्रमाणपत्र (OC) के 46,389 संपत्तियों के उपयोग पर विधानसभा में नगर विकास मंत्री ने कहा कि दोषियों से जुर्माना और समझौता शुल्क वसूला जा रहा है।
Over 46,389 properties in Nashik are operating without an Occupancy Certificate (OC). The Urban Development Minister announced strict penalties in the assembly.
नासिक महानगरपालिका (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nashik Municipal Corporation Property News: नासिक शहर में बिना 'भोगवटा प्रमाणपत्र' (ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट) और 'भवन पूर्णता प्रमाण पत्र' के करीब 46 हजार 389 संपत्तियों का अनाधिकृत रूप से उपयोग किए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री तथा नगर विकास मंत्री ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि इन सभी संपत्तियों को दंडात्मक दायरे में लाया गया है और संबंधित मालिकों से जुर्माना व समझौता शुल्क वसूला जा रहा है।

मानसून सत्र के दौरान सदस्य प्रसाद लाड व अन्य द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए नगर विकास मंत्री ने यह जानकारी दी। मनपा के रिकॉर्ड के अनुसार शहर में कुल लगभग सवा लाख संपत्तियां हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा बिना आवश्यक अनुमति के इस्तेमाल किया जा रहा है।

भोगवटा प्रमाणपत्र इस बात का आधिकारिक प्रमाण होता है कि इमारत स्वीकृत नक्शे के अनुसार बनी है और उपयोग के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस सर्टिफिकेट के बिना इमारत का उपयोग शुरू करने से सुरक्षा, अग्निशमन, पार्किंग, ड्रेनेज और निर्माण मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। ऐसी इमारतों को कानूनी मान्यता नहीं मिलती। मनपा ऐसे मामलों में दंडात्मक कर, समझौता शुल्क और आवश्यकतानुसार अन्य प्रशासनिक कार्रवाई कर रही है।

नियमों के पालन के बाद मिलता है अधिकृत प्रमाण पत्र

नियमों का पालन होने और मंजूरी मिलने के बाद ही संपत्तियों को अधिकृत प्रमाण पत्र दिया जाता है। अनधिकृत रूप से इस्तेमाल हो रही संपतियों पर उनके प्रकार के अनुसार जुर्माना तय किया गया है। इसके तहत आवासीय संपत्तियां 1,500 रुपये का जुर्माना वसूल किया जाएगा।

दुकानें, कार्यालय या अन्य गैर-आवासीय परिसरों के लिए 3,000 का जुर्माना वसूल किया जाएगा, विवाह हॉल (मैरिज हॉल), सिनेमाघर, अस्पताल और बड़े पैमाने के व्यावसायिक निर्माणों के लिए 30,000 रुपये तक का जुर्माना वसूला जाएगा। महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धारा 267 (अ) तथा नगर विकास विभाग के 11 जनवरी 2017 के शासनादेश के प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई शुरू की गई है। इसके बाद 28 फरवरी 2017 को जारी निर्देशों और महानगरपालिका के 8 फरवरी 2019 के आदेशानुसार यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

ओसी मिलने से पहले इस्तेमाल पर लगेगा समझौता शुल्क

नगर नियोजन विभाग के 15 जून 2010 के आदेश के तहत यदि कोई इमारत ओसी मिलने से पहले इस्तेमाल में पाई जाती है, तो उस पर समझौता शुल्क भी लगाया जाता है। नगर विकास मंत्री ने साफ किया कि नियमों के उल्लंघन को नियमित करने के लिए निर्धारित जुर्माना और शुल्क भरने के बाद ही भोगवटा प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। निर्माण नियमों का कड़ाई से पालन हो और शहरी विकास अनुशासित तरीके से आगे बढ़े, इसी उद्देश्य से यह मुहिम चलाई जा रही है।

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