सिंहस्थ कुंभ 2026: 31 अक्टूबर को त्र्यंबकेश्वर मे शंकराचार्य स्वामी विधुशेखर भारती के हाथों फहराएगी धर्म ध्वजा

Trimbakeshwar Simhastha Kumbh 2026: नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ 2026 का आधिकारिक आगाज 31 अक्टूबर को श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी विधुशेखर भारती द्वारा धर्म ध्वजारोहण से होगा।
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नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Sringeri Shankaracharya Swami Vidhushekhara Bharati: नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ कुंभ 2026 का आधिकारिक शंखनाद 31 अक्टूबर 2026 को धर्म ध्वजा की स्थापना के साथ होगा। इस बार का कुंभ आयोजन ऐतिहासिक और स्वर्णिम बनने जा रहा है, क्योंकि त्र्यंबकेश्वर में धर्म ध्वजारोहण दक्षिण आम्नाय श्रृंगेरी शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी विधुशेखर भारती जी के कर-कमलों से संपन्न होगा। कुंभ इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु के हाथों धर्म ध्वजा फहराई जाएगी।

'नवभारत' से विशेष बातचीत में त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष मनोज थेटे ने बताया कि इस बार बन रहे दुर्लभ 'त्रिखंड योग' के कारण नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। नाशिक में रामघाट पर तथा त्र्यंबकेश्वर में नया घाट और पवित्र कुशावर्त कुंड पर धर्म ध्वज की स्थापना की जाएगी। 31 अक्टूबर को दोपहर 12:02 बजे शुभ मुहूर्त में ध्वजारोहण की प्रक्रिया संपन्न होगी।

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दो स्थानों पर लहराएगी भव्य धर्म ध्वजा

पुरोहित संघ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, त्र्यंबकेश्वर में इस बार दो प्रमुख स्थानों पर धर्म ध्वज स्थापित किए जाएंगे:

  1. नया घाट: यहाँ 50 फीट ऊँचे ध्वजस्तंभ पर धर्म ध्वजा स्थापित की जाएगी।

  2. कुशावर्त कुंड: यहाँ 30 फीट ऊँचे स्तंभ पर धर्म ध्वजा लहराएगी।

स्थापित होने वाली धर्म ध्वजा 3 फीट चौड़ी और 6 फीट लंबी होगी। इस आयोजन को लेकर पुरोहित संघ, राज्य शासन, स्थानीय प्रशासन और साधु-संत मिलकर तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं।

सातों अखाड़ों और संतों को भेजा जा रहा आधिकारिक निमंत्रण

इस भव्य और ऐतिहासिक समारोह का साक्षी बनने के लिए त्र्यंबकेश्वर स्थित शैव संप्रदाय के सभी 7 अखाड़ों, उदासीन संप्रदाय के 3 अखाड़ों के श्रीमहंतों और अध्यक्षों को आधिकारिक निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्र के सभी प्रमुख मठों, मंदिरों, आश्रमों के साधु-संतों और महामंडलेश्वरों को आमंत्रित किया गया है। धर्म ध्वजारोहण के साथ ही देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए कुंभ महापर्व की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी।

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