कुंभ 2027 की तैयारी तेज, त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त कुंड में जल शुद्धीकरण व पुनरुद्धार परियोजना शुरू; 3 घंटे मे
Nashik Kushavart Kund Cleaning: त्र्यंबकेश्वर के पवित्र कुशावर्त कुंड में कुंभ 2027 से पहले जल शुद्धीकरण और पुनरुद्धार परियोजना लागू की जा रही है, जिससे पानी को स्वच्छ और स्नान योग्य बनाया जाएगा।
- Written By: अंकिता पटेल
Trimbakeshwar Kumbh 2027 ( Source: Social Media )
Trimbakeshwar Kumbh 2027: नासिक त्र्यंबकेश्वर स्थित पवित्र कुशावर्त कुंड में सिंहस्थ कुंभमेला 2027 के मद्देनजर ‘नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण’ द्वारा जल शुद्धीकरण और पुनरुद्धार परियोजना लागू की जा रही है।
कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत साकार होने वाली इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कुंभ मेले के दौरान कुंड के पानी को पूरी तरह स्वच्छ और स्नान योग्य बनाए रखना है।
वर्तमान में कुंड के पानी के पुनर्चक्रण की प्रक्रिया काफी धीमी है, जिसे आधुनिक तकनीक से सुधारा जाएगा। वर्तमान में पानी रीसायकल होने में लगभग 9 घंटे लगते हैं।
सम्बंधित ख़बरें
बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: महाराष्ट्र के 157 अनुदानरहित कॉलेजों को मिलेगी 290 करोड़ की शुल्क प्रतिपूर्ति
अशोक खरात मामले में पत्नी कल्पना की मुश्किलें बढ़ीं; कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
संभाजीनगर में मतीन शेख को अवैध निर्माण नोटिस, HC में चुनौती; निदा खान मामले के बाद नगरसेवक पर कार्रवाई तेज
नासिक TCS कांड में राष्ट्रीय महिला आयोग ने पेश की रिपोर्ट, निदा खान को लेकर चौंकाने वाला खुलासा
प्रस्तावित नई प्रणाली के माध्यम से इस समय को घटाकर 3 घंटे से भी कम करने का लक्ष्य है। कुंड में सीधे ‘निर्माल्य’ विसर्जित न हो, इसके लिए विशेष फिल्टर और उपाय किए जाएंगे, इसके संचालन और बेहतर देखभाल के लिए एक स्वतंत्र व्यवस्था बनाई जाएगी ताकि अगस्त 2026 तक कार्य पूर्ण होने के बाद भी इसकी गुणवत्ता बनी रहे।
कुंभमेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह ने परियोजना के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री का निर्देश है कि पवित्र स्थलों का जल न केवल स्वच्छ होना चाहिए, बल्कि वह स्वच्छ दिखना भी चाहिए, श्रद्धालुओं को उस जल की शुद्धता का प्रत्यक्ष अनुभव होना चाहिए।
9 पवित्र स्थलों का होगा पुनरुद्धार
कुंभ मेला प्राधिकरण त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र के कुल 9 पवित्र स्थलों के कायाकल्प के लिए प्रयासरत है। इनमें इद कुंज, वित्व तीर्थ, प्रयाग तीर्थ, मुकुंदेश्वर तीर्थ, संगम तीर्थ, गौतमेश्वर मंदिर और गौतमेश्वर तालाब जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल है।
पुरातत्व विभाग द्वारा तीन चरणों में संरक्षण
राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा कुशावर्त परिसर का संरक्षण निम्नलिखित चरणों में किया जा रहा है कुंड परिसर के प्राचीन मंदिरों और प्लेटफॉर्म की मरम्मत।
गंगा-गोदावरी मंदिर प्रांगण और कुंड की ऐतिहासिक सीढ़ियों का सुदृढ़ीकरण।
श्रद्धालुओं के लिए कपड़े बदलने के कमरे और पूरे परिसर में आधुनिक प्रकाश व्यवस्था।
यह भी पढ़ें:-ई-गवर्नेंस सुधार में नासिक पुलिस आयुक्तालय राज्य में नंबर-1, मुख्यमंत्री ने आयुक्त संदीप कर्णिक किया सम्मानित
कुशावर्त कुड का प्रत्येक श्रद्धालु के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व है। सिंहस्थ 2027 के अनुरूप हम जल की निर्मलता और स्वच्छता के उच्चतम मानकों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।
-कुंभ मेला प्राधिकरण, आयुक्त, शेखर सिंह
