त्र्यंबकेश्वर-डहाणू रेल मार्ग की मांग फिर सुर्खियों में, संसद में उठा मुद्दा, रेल कनेक्टिविटी की बढ़ी उम्मीद
Nashik Railway Connectivity Project: त्र्यंबकेश्वर को डहाणू से रेल मार्ग से जोड़ने की मांग फिर चर्चा में है। संसद में मुद्दा उठने के बाद स्थानीय नागरिकों में इस परियोजना को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
Trimbakeshwar Dahanu Railway Line Demand ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Trimbakeshwar Dahanu Railway Line Demand: त्र्यंबकेश्वर को डहाणू से रेल मार्ग द्वारा जोड़ने की लगभग १० वर्ष पुरानी मांग एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में इस विषय पर संसद में हुई चर्चा के बाद स्थानीय नागरिकों की उम्मीदें फिर से परवान चढ़ने लगी हैं।
देश के लगभग सभी प्रमुख कुंभ मेला स्थल रेलवे नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, इसी तर्ज पर त्र्यंबकेश्वर को भी रेल मार्ग से जोड़ने की मांग दशकों से की जा रही है।
इतिहास और राजनीतिक उपेक्षा
ऐतिहासिक रूप से, त्र्यंबकेश्वर पहले डहाणू निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा था। उस समय जवाहर के तत्कालीन राजा, डहाणू और त्र्यंबकेश्वर कांग्रेस कमेटी ने इस परियोजना के लिए लगातार प्रयास किए थे।
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हालांकि, निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन के बाद त्र्यंबकेश्वर को नासिक लोकसभा क्षेत्र में शामिल कर लिया गया। आरोप है कि नासिक के जनप्रतिनिधियों ने इस महत्वपूर्ण मांग की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया।
महंत हरि गिरी महाराज ने एक बार फिर बुलंद की आवाज
इस रेल मार्ग के लिए पूर्व सांसद स्वर्गीय शिंगाडा और स्वर्गीय वनगा ने भी आवाज उठाई थी, परंतु उनके बाद यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में बला गया, बीच के कालखंड में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महत हरि गिरी महाराज ने इस मांग को फिर से पूरी ताकत के साथ उठाया। पूर्व में इस परियोजना का नक्शा भी तैयार किया गया था, जो लंबे समय से धूल फांक रहा है।
ज्योतिर्लिंगों का जुड़ाव
श्रद्धालुओं और नागरिकों की मांग है कि सौराष्ट्र के सोमनाथ और नासिक के त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग को रेल मार्ग से जोड़ा जाए, कुंभ मेला क्षेत्र होने के कारण इस मार्ग का महत्व और भी बढ़ जाता है।
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अब जबकि यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया है, नागरिकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार यह वर्षों पुराना सपना धरातल पर उतरेगा।
