मकानों की गिनती के दौरान दिखे जिंदगी के दो पहलू: शिक्षक ने साझा किए जनगणना के भावुक अनुभव
Nashik census 2026: सुरगाणा में जनगणना के दौरान शिक्षक सचिन महाले को अनोखे अनुभव मिले। कहीं 25 लोगों का संयुक्त परिवार मिला, तो कहीं अपनों को तरसती बुजुर्ग दादी का अकेलापन दिखाई दिया।
- Written By: रूपम सिंह
जनगणना (फोटो सोर्स- नवभारत)
Nashik Census 2026 Sachin Mahale Teacher: गांव-गांव घूमकर जनगणना और मकानों की गिनती करते समय केवल घरों और लोगों की संख्या ही दर्ज नहीं हुई, बल्कि मानवीय भावनाएं, रिश्ते और जीवन की वास्तविकता भी बहुत करीब से देखने को मिली। यह भावुक अनुभव सुरगाणा के एक आश्रम स्कूल के माध्यमिक शिक्षक और प्रगणक सचिन महाले ने व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि घरों को गिनते समय इंसानों से मिलने और उनके जीवन के आंकड़े लिखते समय असल जिंदगी को समझने का मौका मिला।
शिक्षक महाले ने बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान उन्होंने देखा कि हर व्यक्ति अपने-अपने स्तर पर संघर्ष कर रहा है। कोई गरीबी से, कोई अकेलेपन से, तो कोई परिस्थितियों से लड़ रहा है, लेकिन इन सबके बीच इंसानियत की जो शीतलता देखने को मिली, उसने दिल को छू लिया।
संयुक्त परिवारों को भी देखने का मिला अवसर
मकानों की गिनती के दौरान जीवन के दो अलग-अलग पहलू सामने आए, जिसमें कुछ जगहों पर कम जगह होने के बावजूद बड़े परिवार बेहद खुशी-खुशी एक साथ रहते मिले। एक घर में 25 सदस्य और दूसरे घर में 23 सदस्य एक साथ रहते देखकर बदलते समय में भी ‘संयुक्त परिवार प्रणाली’ का महत्व रेखांकित हुआ। टूटते रिश्तों के इस दौर में इन परिवारों ने समाज के सामने एक बेहतरीन आदर्श पेश किया है।
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इसके विपरीत, एक बहुत बड़े घर में बिल्कुल अकेली रहने वाली एक बुजुर्ग दादी से हुई मुलाकात ने दिल को झकझोर कर रख दिया। उनके कहे शब्द, मेरा कोई नहीं है, अकेलेपन की दर्दनाक वास्तविकता को बयां कर रहे थे। कुछ जगहों पर भरपूर समृद्धि होने के बावजूद लोगों की कमी खली।
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कई लोगों ने बताई अपनी मुश्किलें
सुरगाणा तहसील में मकानों की गिनती के दौरान एक आश्रम स्कूल के माध्यमिक शिक्षक द्वारा साझा किया गया अनुभव है। कड़कड़ाती धूप में घर-घर जाते समय ग्रामीणों ने सर, पानी पीकर जाइए और थोड़ी देर बैठिए जैसे आत्मीय शब्दों में जो स्वागत किया, वह मन को छू गया।
इन अनुभवों से यह साफ महसूस हुआ कि समाज में आज भी इंसानियत जिंदा है। इसके अलावा, छात्रों के घरों तक सीधे पहुंचने का अवसर मिला, जिससे अपने ‘सर’ को अपने घर आया देख छात्रों के चेहरों पर एक अलग ही खुशी और चमक दिखाई दे रही थी।
