सिंहस्थ कुंभ मेला 2027: महाराष्ट्र सरकार ने ‘पुरोहित-कनिष्ठ सहायक पुरोहित’ पाठ्यक्रम शुरू किया

Sinhstha Kumbh Mela 2027: सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने नासिक-त्र्यंबकेश्वर में पुरोहित-कनिष्ठ सहायक पुरोहित पाठ्यक्रम शुरू किया है, जिस पर कुछ पुरोहितों ने आपत्ति जताई है।
Sinhstha Kumbh Mela 2027:सिंहस्थ कुंभ मेला 2027
Maharashtra government (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nashik Trimbakeshwar: महाराष्ट्र सरकार के कौशल विकास विभाग ने त्र्यंबकेश्वर-नासिक में 2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले के मद्देनजर ‘पुरोहित-कनिष्ठ सहायक पुरोहित’ (जूनियर सहायक पुजारी-वैदिक संस्कार जूनियर सहायक) पाठ्यक्रम शुरू किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। यह पाठ्यक्रम सभी समुदायों के सदस्यों के लिए खुला है, हालांकि कुछ पुरोहित इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध करने वालों का दावा है कि वैदिक अनुष्ठानों का संचालन करने के लिए ‘उपनयन संस्कार’ आवश्यक होता है।

एक अधिकारी ने कहा, “कुंभ मेले के दौरान नासिक और त्र्यंबकेश्वर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने एक अल्पकालिक, रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम की घोषणा की थी। इसके तहत राज्य कौशल विकास विभाग और कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय (रामटेक) द्वारा 21 दिवसीय पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।” उन्होंने बताया कि 12 से 45 वर्ष आयु वर्ग के छात्रों को वैदिक अनुष्ठानों, उनकी व्यवस्थाओं, मंत्रोच्चार, विभिन्न संस्कारों तथा हिंदू रीति-रिवाजों से संबंधित सामग्री की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

प्रमाण पत्र प्रदान

21 दिनों का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को उनके प्रदर्शन और उपस्थिति के आधार पर प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके आधार पर वे अनुष्ठान कर सकेंगे या अन्य पुजारियों की सहायता कर सकेंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कुंभ मेला और यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आपस में सीधे तौर पर जुड़े नहीं हैं। कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय के वेदविद्या विभाग के प्रमुख डॉ. अमित भार्गव ने कहा, “ब्राह्मणों सहित सभी समुदायों के छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद 10 दिवसीय एक अन्य पाठ्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें कुंभ से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

पुरोहितों के एक वर्ग द्वारा इस पाठ्यक्रम का कड़ा विरोध

हालांकि, पुरोहितों के एक वर्ग द्वारा इस पाठ्यक्रम का कड़ा विरोध किया जा रहा है। पुरोहित हेमंत पिसोलकर ने दावा किया, “उपनयन संस्कार के बिना वेदों का अध्ययन संभव नहीं है। इसके लिए यज्ञोपवीत धारण करना अनिवार्य होता है। इसलिए यहां जाति और समुदाय का प्रश्न उठता है। हमारे यजमान भी किसी ब्राह्मण के अलावा अन्य किसी को अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए पुरोहित के रूप में स्वीकार नहीं करते।” उन्होंने सवाल उठाया, “हमारे बच्चे संहिता सीखने में कम से कम सात वर्ष लगाते हैं। ऐसे में लोग इतने कम समय में अनुष्ठान और मंत्र कैसे सीख सकते हैं?”

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