शालार्थ ID घोटाले पर नासिक SIT की कार्रवाई: रैकेट का मुख्य आरोपी व रसूखदार संस्थान संचालक संजय गरुड़ गिरफ्तार

Shalarth ID Scam: महाराष्ट्र के चर्चित शालार्थ आईडी घोटाले में नासिक एसआईटी ने मुख्य आरोपी संजय गरुड को सोलापुर के नातेपुते स्थित फार्महाउस से गिरफ्तार किया। जांच में कई बड़े खुलासों की उम्मीद है।
Nashik SIT action on Shalarth ID scam: Sanjay Garud, the prime accused in the racket and an influential institute operator, arrested.
शालार्थ आईडी घोटाला,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Nashik Shalarth ID Scam Arrest: महाराष्ट्रभर में सनसनी फैलाने वाले बहुचर्चित 'शालार्थ आईडी' घोटाले में नासिक की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए इस पूरे रैकेट के मुख्य आरोपी, भाजपा पदाधिकारी तथा रसूखदार शिक्षण संस्थान संचालक संजय गरुड को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है।

नासिक अपराध शाखा की विशेष टीम ने सोमवार देर रात सोलापुर जिले के नातेपुते क्षेत्र में बने एक गुप्त फार्महाउस पर दबिश देकर उसे अपनी हिरासत में ले लिया। मुख्य आरोपी संजय गरुड मूल रूप से जलगांव जिले की जामनेर तहसील के शेंदूर्णी क्षेत्र का रहने वाला है और वह कई बड़े शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करता है।

राजनीतिक जोड़तोड़ के तहत उसने आगामी चुनावी लाभ के लिए 20 जनवरी 2024 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया था। जांच एजेंसियों का पुख्ता मानना है कि इस मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद अब इस मेगा घोटाले से जुड़े कई गहरे और चौंकाने वाले राज बाहर आएंगे।

पूर्व शिक्षा अधिकारी शशिकांत हिंगोणीकर की गिरफ्तारी से खुला था

राज इस गंभीर मामले की कड़ियां तब जुड़नी शुरू हुईं जब कुछ दिन पहले जलगांव जिला परिषद के तत्कालीन शिक्षणाधिकारी शशिकांत हिंगोणीकर को एसआईटी ने गिरफ्तार किया था।

गहन पूछताछ में यह बात सामने आई थी कि हिंगोणीकर ने अपने पद और अधिकारों का घोर दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर कुल 259 शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को अवैध रूप से व्यक्तिगत मान्यता (पर्सनल अप्रूवल) प्रदान कर दी थी।

841 शिक्षकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग

इनमें से अधिकांश शिक्षक सीधे तौर पर मुख्य आरोपी संजय गरुड की विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं से ही जुड़े हुए पाए गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिंगोणीकर से पूछताछ के दौरान हाथ लगी बेहद गोपनीय और पुख्ता जानकारियों के आधार पर ही एसआईटी ने सोलापुर में जाल बिछाकर गरुड को धर दबोचा, प्रारंभिक और बेहद चौकाने वाली जांच में खुलासा हुआ है कि नासिक, जलगांव, धुलिया और नंदुरबार इन चार प्रमुख जिलों के कुल 841 शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के नामों और दस्तावेजों का इस घोटाले में बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है।

प्राथमिक जांच के मुताबिक, अकेले मुख्य आरोपी संजय गरुड की 15 अलग-अलग शैक्षणिक संस्थाओं के 177 कर्मचारियों को फर्जी और गैरकानूनी तरीके से शालार्थ आईडी और व्यक्तिगत मान्यता दिलवाई गई।

438 कर्मचारी जलगांव से

इन पूरी तरह फर्जी शालार्थ आदेशों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों ने सरकारी खजाने से वेतन उठाकर राज्य सरकार को लगभग 160 करोड़ रुपये का भारी-भरकम आर्थिक चूना पहुंचाया है। जांच एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस पूरे सिंडिकेट में सामने आए कुल 481 कर्मचारियों में से अकेले 438 कर्मचारी सिर्फ जलगांव जिले से ताल्लुक रखते हैं, जो इस बात का सबूत है कि इस घोटाले का मुख्य केंद्र जलगांव और गरुड की संस्थाएं थी।

विदित हो कि बहुचर्चित शालार्थ आईडी घोटाले में गिरफ्तारी के मामले में संजय गरुड अब इस रैकेट का छठा आरोपी बन गया है। नासिक एसआईटी अब उसे रिमांड पर लेकर इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, हवाला कनेक्शन और इसमें शामिल अन्य बड़े चेहरों की गहनता से कुंडली खंगाल रही है।

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