शालार्थ ID घोटाला: नासिक EOW ने मुख्य एजेंट वाडिले को किया गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेजों पर खड़ा किया था 65 स्कूल

Shalarth Id Scam: नासिक ईओडब्ल्यू ने शालार्थ आईडी घोटाले के मुख्य एजेंट प्रशांत वाडिले को गिरफ्तार किया। जांच में 65 फर्जी स्कूल, करोड़ों की रिश्वत और 50% कमीशन नेटवर्क का खुलासा हुआ।
Shalarth Id Scam Mastermind Arrested Prashant Wadile Fake 65 Schools
शालार्थ ID घोटाले का मेन एजेंट हुआ गिरफ्तार (फोटो नवभारत)
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Shalarth Id Scam Mastermind Arrested: उत्तर महाराष्ट्र के शिक्षा क्षेत्र को झकझोर देने वाले चर्चित शालार्थ आईडी घोटाले के मुख्य एजेंट प्रशांत तुलसीराम वाडिले की गिरफ्तारी के बाद बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

आरोपी वाडिले ने किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तर्ज पर शिक्षा विभाग में रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी का एक बड़ा जाल बिछा रखा था। शिक्षा विभाग के फंड पर पूरे 50 प्रतिशत का डाका डालने वाली उसकी स्वतंत्र रिकवरी प्रणाली और कागजों पर खड़े किए गए 65 स्कूलों के साम्राज्य को देखकर जांच एजेंसियां भी हैरान रह गई हैं।

नासिक शहर आर्थिक अपराध शाखा ने शनिवार को धुलिया में जाल बिछाकर वाडिले को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद नासिक रोड कोर्ट ने उसे आगामी 17 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

जांच में सामने आई यह जानकारी

जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, वाडिले ने शालार्थ आईडी दिलाने के नाम पर प्रत्येक संदिग्ध शिक्षक से 20 लाख रुपये की तय रकम ली थी। इस राशि का बंटवारा भी बेहद योजनाबद्ध तरीके से किया जाता था।

वाडिले खुद अपने पास 10 से 12 लाख रुपये रखता था और शेष 8 से 10 लाख रुपये संबंधित वेतन एवं भविष्य निधि अधीक्षक कार्यालय, उप शिक्षा निदेशक और कार्यालयीन लिपिकों तक पहुंचाता था।

इस बीच, पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के आदेश पर अपराध शाखा के सहायक आयुक्त संदीप मिटके और आर्थिक अपराध शाखा के वरिष्ठ निरीक्षक रामदास शेलके इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद अब कई शिक्षक, अधिकारी और अन्य एजेंट जांच के दायरे में आ गए हैं।

वाडिले की वसूली टीम का काम

वाडिले ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर कागजों पर 65 से अधिक आश्रमशालाओं और स्कूलों का नेटवर्क दिखाया था। लेकिन, जब पुलिस ने जमीनी स्तर पर इसकी जांच की, तो साक्री और शिंदखेड़ा इलाके में केवल 2 संस्थान ही वास्तव में अस्तित्व में मिले।

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि शेष सभी संस्थान केवल फर्जी दस्तावेजों, फर्जी नियुक्ति आदेशों और शिक्षा विभाग के बोगस प्रमाणपत्रों के बल पर सरकारी खजाने को लूटने के उद्देश्य से ही तैयार किए गए थे। शिक्षकों के मेडिकल बिलों को मंजूर कराने या पिछले बकाये वेतन का अंतर दिलाने के लिए वाडिले की एक स्वतंत्र वसूली टीम काम करती थी।

बकाये की राशि जारी कराने के लिए वह 50 फीसदी तक कमीशन वसूलता था। इस कमीशन का एक हिस्सा वह संबंधित वेतन विभाग, विस्तार अधिकारियों और उप शिक्षाधिकारियों में बांट देता था और खुद पर्दे के पीछे सुरक्षित रहता था।

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