नासिक की 25 वर्षीय सायली भोर का कमाल; यूरोप से सीखी तकनीक, भारत में लॉन्च करेंगी ‘नॉन-अल्कोहोलिक वाइन’ ब्रांड
Nashik Wine Capita: नासिक की 25 वर्षीय सायली भोर यूरोप से तकनीकी अनुभव लेकर भारत में 'नॉन-अल्कोहोलिक वाइन' ब्रांड लॉन्च करने जा रही हैं। उन्होंने इस क्षेत्र की रूढ़ियों को तोड़ा है।
- Written By: रूपम सिंह
'नॉन-अल्कोहोलिक वाइन' ब्रांड (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Nashik Wine Capital Sayali Santosh Bhor: नासिक देश की ‘वाइन कैपिटल’ कहे जाने वाले नासिक से एक युवा प्रेरणास्पद कहानी सामने आई है। महज 25 वर्ष की उम्र में सायली संतोष भोर ने वाइन उद्योग में तकनीकी विशेषज्ञता और उद्यमिता का एक नया अध्याय लिखा है। यूरोप में अनुभव और ज्ञान अर्जित करने के बाद, सायली अब भारत में ‘नॉन-अल्कोहोलिक वाइन’ का अपना ब्रांड बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं।
परंपरा तोड़कर अपनाई राह
अपने देश में आमतौर पर वाइन उद्योग को महिलाओं के लिए परंपरागत क्षेत्र नहीं माना जाता, लेकिन सायली ने इस धारणा को चुनौती दी।
आडगांव में स्थित अपने परिवार के अंगूर के खेतों से प्रेरित होकर उन्होंने अंगूरों के मूल्यवर्धित उपयोग पर ध्यान दिया। उनके साथ इस नवाचार में बेल्जियम से प्रशिक्षित मेघराज दीक्षित भी भागीदार के रूप में कार्य कर रहे हैं।
शिक्षा व तकनीकी विशेषज्ञता की मजबूत नींव
सायली की शैक्षणिक यात्रा उनके संकल्पों को दर्शाती है- प्रारंभिक शिक्षा रयत शिक्षण संस्था से स्कूल और के। के। वाघ महाविद्यालय से 12वीं। स्नातक व स्नातकोत्तर आर। वाई। के। महाविद्यालय से बी।एससी। और पुणे के वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट से पोस्ट ग्रेजुएशन। वाइन ब्रूइंग और अल्कोहोल टेक्नोलॉजी में मास्टर्स डिग्री हासिल की। अपनी पढ़ाई के बाद सायली ने जर्मनी, फ्रांस और यूरोप के कई देशों में जाकर वाइन निर्माण का बारीकी से तकनीकी अनुभव प्राप्त किया।
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लेखन पर भी दबदबा
सायली न केवल एक उद्यमी हैं, बल्कि एक लेखिका भी है। उन्होंने वाइन उद्योग पर आधारित 140 पृष्टों की एक अंग्रेजी पुस्तक लिखी है, जिसे पाठकों का काफी अच्छा प्रतिसाद मिला है। वे सोशल मीडिया के माध्यम से भी वाइन के बारे में तकनीकी जानकारी साझा करती हैं, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है।
पर्यटन को मिलेगी नई दिशा
नासिक प्रतिवर्ष हजारों वाइन पर्यटकों का स्वागत करता है। सायली का ‘नॉन-अल्कोहोलिक’ वाइन उत्पाद इस उद्योग को एक नई दिशा देगा। उनका सपना है कि वाइन का स्वाद हर किसी तक पहुंचे, भले ही वे अल्कोहल का सेवन न करते हों। यह प्रयास नासिक के वाइन उद्योग को वैश्विक मंच पर और अधिक विशिष्ट पहचान दिलाने में सक्षम है।
