नासिक के साधु संतों ने की सरकार से मांग, हरिद्वार की तर्ज पर मिले तीर्थक्षेत्र का सम्मान
रामायण काल से जुड़े होने के कारण नासिक भारत के सबसे पवित्र धर्म स्थलों में से एक हैं। यहां के साधु संतों ने नासिक को हरिद्वार की ही तरह तीर्थक्षेत्र का दर्जा दिलाने की मांग की हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
नासिक तीर्थक्षेत्र (सौजन्यः सोशल मीडिय)
Nashik News In Hindi: भारत के प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक नासिक को अब हरिद्वार की तर्ज पर तीर्थक्षेत्र का आधिकारिक दर्जा मिलने की राह साफ होती दिख रही है। त्र्यंबकेश्वर को हाल ही में ‘अ’ श्रेणी का दर्जा मिलने के बाद साधु-संतों और अखाड़ों ने नासिक को भी यही मान्यता दिलाने की मांग तेज कर दी है।
जिला कलेक्टर जलज शर्मा ने तपोवन में संतों से चर्चा के बाद इस पर सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने सरकार को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासन का मानना है कि 2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले यह मान्यता मिलने से व्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी।
बता दें कि वर्ष 2015 के कुंभ मेले के बाद से ही यह मांग लंबित थी। अब कलेक्टर ने संकेत दिए हैं कि प्रस्ताव में नासिक के धार्मिक महत्व, कुंभ परंपरा और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को आधार बनाकर सरकार से मंजूरी मांगी जाएगी। बैठक में यह तर्क दिया गया कि हरिद्वार को तीर्थक्षेत्र का दर्जा मिलने से वहां धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, अतिक्रमण पर रोक और भक्तों के लिए सुविधाएं बेहतर हुईं। नासिक में भी घाटों और मंदिरों के आसपास यही व्यवस्था लागू होनी चाहिए।
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स्मार्तचूड़ामणि पंडित शांताराम शास्त्री भानोसे ने कहा है कि नासिक तीर्थस्थलों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। युगों-युगों से इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है। सिंहस्थ से पहले तो नासिक को तीर्थक्षेत्र का दर्जा मिल ही जाना चाहिए।
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तीर्थक्षेत्र का दर्जा मिलने के फायदे
- घाटों और मंदिरों से अतिक्रमण हटेगा
- धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू होंगे
- शराब व मांस बिक्री पर प्रतिबंध लगेगा
- होटलों को भक्त्त निवास के रूप में विकसित किया जाएगा
- व्यावसायिक शोषण पर रोक लगेगी
- गोदावरी घाटों की सफाई व मरम्मत होगी
- स्थायी जल शुद्धिकरण प्रणाली स्थापित होगी
