शरद पवार की राकां के नासिक शिविर में हंगामा, विधायकों की गैरहाजिरी से मचा बवाल
Nashik News: नासिक में शरद पवार गुट की राकांपा का शिविर हुआ जिसमें कई विधायक और सांसद शुरुआत में अनुपस्थित रहे। इससे पार्टी में बगावत की अटकलें लगीं, लेकिन बाद में ये कयास गलत साबित हुए।
- Written By: सोनाली चावरे
शरद पवार (pic credit; social media)
Uproar in Nashik Camp: शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नासिक में रविवार को आयोजित एक दिवसीय शिविर में शुरू से ही हलचल देखने को मिली। पार्टी प्रमुख शरद पवार, प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे और सांसद सुप्रिया सुले मंच पर मौजूद रहे, लेकिन कई विधायकों और सांसदों की गैरमौजूदगी ने सियासी गलियारों में चर्चा छेड़ दी।
शिविर की शुरुआत में शरद पवार गुट के 10 विधायकों में से केवल 5 ही मौजूद थे। इसी के बाद पार्टी के भीतर एक बार फिर टूट की अटकलें लगने लगीं। विपक्षी खेमे में यह सवाल जोर पकड़ने लगा कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में विधायक और दो सांसद शिविर से गायब क्यों हैं। क्या पार्टी में फिर से खींचतान शुरू हो गई है?
हालांकि कुछ ही घंटों बाद तस्वीर बदल गई। धीरे-धीरे विधायकों की संख्या 7 तक पहुंची और अनुपस्थित नेताओं के सही कारण भी सामने आ गए। पार्टी नेताओं ने साफ किया कि यह महज संयोग है और किसी तरह का राजनीतिक संकट नहीं है। इसके साथ ही पार्टी टूट की अटकलों पर फिलहाल ब्रेक लग गया।
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पार्टी प्रमुख शरद पवार ने अपने संबोधन में कहा कि “राकांपा (एसपी) जनता की ताकत से खड़ी हुई है और किसी भी अफवाह से प्रभावित नहीं होगी। हम सब मिलकर महाराष्ट्र के लिए नई दिशा तय करेंगे।” सुप्रिया सुले ने भी कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि पार्टी मजबूत है और संगठन में अनुशासन ही सबसे बड़ी ताकत है।
प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने कहा कि विपक्षी दल लगातार अफवाहें फैला रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि कार्यकर्ताओं का उत्साह राकांपा (एसपी) को और मजबूत बना रहा है। शिविर में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि विधायकों की अनुपस्थिति ने भले ही एक पल के लिए पार्टी के अंदर संकट की तस्वीर खींच दी हो, लेकिन शरद पवार की पकड़ और नेतृत्व क्षमता ने माहौल संभाल लिया।
कुल मिलाकर, नाशिक शिविर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अफवाहें चाहे जितनी भी तेज हों, शरद पवार का कद और अनुभव आज भी पार्टी को एकजुट रखे हुए है। फिलहाल टूट की आशंकाओं पर विराम है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में समीकरण कब बदल जाएं, कहना मुश्किल है।
