नासिक कुंभ तैयारियों को झटका, एनजीटी की पेड़ कटाई पर रोक से 10 लेन सड़क और अंडरपास परियोजनाएं प्रभावित

Nashik Road Dwarka Project: नासिक में कुंभ मेले से पहले नासिक रोड-द्वारका 10 लेन सड़क परियोजना में पेड़ों की कटाई पर एनजीटी की रोक से काम रुक गया है, जिससे प्रशासन के सामने समयसीमा की बड़ी चुनौती है।
Nashik Road-Dwarka 10-lane road project faces hurdles ahead of Kumbh Mela due to NGT stay on tree cutting till August 14, creating a massive deadline challenge for them.
नासिक रोड-द्वारका (फाइल फोटो, सोर्स- सोशल मिडीया )
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Nashik Kumbh Mela 2027 Project: कुंभ मेले के मद्देनजर नासिक के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कवायद के बीच, नासिक रोड-द्वारका दस लेन सड़क परियोजना एक बड़ी बाधा का सामना कर रही है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा 14 अगस्त तक पेड़ों की कटाई पर लगाई गई रोक के कारण सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड और यातायात सुधार के करोड़ों रुपये के कार्य फिलहाल अधर में लटक गए हैं।

प्रशासन ने कुंभ मेले से पूर्व सभी परियोजनाओं को युद्धस्तर पर पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन पर्यावरणीय प्रतिबंधों ने रफ्तार धीमी कर दी है। परियोजना पर पड़ने वाले मुख्य प्रभाव- सबसे अधिक असर सर्विस रोड के निर्माण पर पड़ रहा है, जहाँ कुछ बड़े पेड़ों के कारण काम पूरी तरह रुका हुआ है।

218 करोड़ रुपये की द्वारका अंडरपास परियोजना, जिसे एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है, इस विवाद के कारण प्रभावित हो सकती है। 258 करोड़ रुपये की दस लेन सड़क परियोजना के लिए निविदाएं अगले सप्ताह मंजूरी के लिए तैयार हैं, लेकिन पेड़ों की मौजूदगी भविष्य में फिर अड़चन पैदा कर सकती है।

हरे पेड़ों के मुद्दे पर प्रशासन असमंजस में

पेड़ों के मुद्दे पर प्रशासन अभी तक किसी स्पष्ट निर्णय पर नहीं पहुंच पाया है। पिछले कुंभ मेले के दौरान भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी, तव पेड़ों को सुरक्षित रखते हुए वैकल्पिक योजना तैयार की गई थी। इस बार भी प्रशासन उसी राह पर विचार कर सकता है, या फिर कानूनी अनुमतियां लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करेगा।

वैकल्पिक योजना तैयार करने में जुटा विभाग

नासिक मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं का आगमन होता है, जिसे देखते हुए इस मार्ग का चौड़ीकरण अत्यंत अनिवार्य है। यदि 14 अगस्त तक यह गतिरोध बना रहता है, तो नासिक कुंभपूर्व विकास कार्यों की समयसीमा का पालन करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। अधिकरण की अगली सुनवाई और प्रशासन द्वारा अपनाई जाने वाली वैकल्पिक रणनीति पर टिकी हैं।

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