नासिक रिंग रोड विवाद: CM आवास पर होने वाला आंदोलन 30 जून तक टला; मंत्री महाजन के आश्वासन पर किसान ने दी मोहलत

Nashik Ring Road: नासिक रिंग रोड परियोजना से प्रभावित किसानों ने मुख्यमंत्री आवास 'वर्षा' के सामने प्रस्तावित आंदोलन 30 जून तक स्थगित कर दिया है। सरकार ने बैठक और समाधान का आश्वासन दिया है।
Nashik Ring Road Dispute: Protest at CM's residence deferred until June 30; farmer grants reprieve following Minister Mahajan's assurance.
प्रभावित किसान, आंदोलन स्थगित, (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nashik Ring Road Farmers Protest: नासिक में रिंग रोड परियोजना से प्रभावित किसानों ने मुंबई में मुख्यमंत्री आवास 'वर्षा' के सामने प्रस्तावित अपना आंदोलन 30 जून तक स्थगित कर दिया है। कुंभमेला मंत्री गिरीश महाजन द्वारा दूरभाष पर दी गई सकारात्मक बातचीत और उच्चस्तरीय बैठक के आश्वासन के बाद किसान प्रतिनिधियों ने सरकार को अपनी मांगों पर ठोस निर्णय लेने के लिए कुछ और समय देने का निर्णय लिया है।

मंत्री महाजन से बात

छावा क्रांतिवीर सेना के नेतृत्व में किसान अपने हक और न्याय की मांग को लेकर मुंबई कूच करने की तैयारी में थे। आंदोलन की शुरुआत मुंबई नाका स्थित फुले दंपति के स्मृतिस्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित कर की गई थी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए प्रशासन तुरंत हरकत में आया। मंत्री गिरीश महाजन के स्वीय सहायक संदीप जाधव और पुलिस उपायुक्त काले ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर किसानों से चर्चा की। छावा क्रांतिवीर सेना के संस्थापक अध्यक्ष करण गायकर की मंत्री गिरीश महाजन से सीधे फोन पर बात हुई। मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी और आगामी शनिवार को इस संबंध में एक उच्वस्तरीय बैठक बुलाई जाएगी।

किसानों की प्रमुख मांगें

न्यायपूर्ण मुआवजाः रिंग रोड के कारण प्रभावित हुई जमीनों का सही बाजार मूल्य। प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन, प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक सुविधाएं और पुनर्वास की स्पष्ट योजना।

संगठनों की दो टूक- समाधान नहीं, तो आंदोलन तय

आंदोलन स्थगित करने के चावजूद किसान संगठनों ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। करण गायकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि शनिवार को होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में कोई ठोस और लिखित समाधान नहीं निकलता है, तो 30 जून को मुख्यमंत्री आवास के सामने आंदोलन निश्चित होगा, किसानों का कहना है कि वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होने वाले, उन्हें परियोजना से प्रभावित जमीन, उचित मुआवजा, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और पुनर्वसन जैसे मुद्दों पर सरकार से लिखित निर्णय चाहिए।

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