नासिक विकास कार्य पर रोक, राम काल पथ विवाद: पार्षदों से पूछताछ; कमीशन एंगल की जांच
Nashik Corporators Questioning: नासिक में राम काल पथ प्रोजेक्ट विवाद में पुलिस ने पार्षदों से पूछताछ बढ़ाई। काम रोकने के पीछे कमीशन मांग का एंगल जांच के घेरे में है।
- Written By: अंकिता पटेल
राम काल पथ विवाद( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Project Controversy: नासिक पंचवटी क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों को रुकवाने के मामले में पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पंचवटी के कुछ पार्षदों और पूर्व पार्षदों से पूछताछ करने के बाद, अब सिडको, सातपुर और मध्य नासिक के अन्य पार्षदों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
चर्चा है कि यह पूरा विवाद विकास कार्यों में ‘प्रतिशत’ (कमीशन) की मांग को लेकर शुरू हुआ, जिसके कारण काम रोक दिया गया था। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले ‘राम काल पथ’ को लेकर चल रहे विवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं पंचवटी में कुछ राजनीतिक लोगों द्वारा इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का काम बंद करा दिया गया था।
मनपा आयुक्त मनीषा खत्री के कड़े हस्तक्षेप के बाद यह काम दोबारा शुरू हुआ। उन्होंने चेतावनी दी है कि सिंहस्थ कार्यों में बाधा डालने वालों पर कानूनी गाज गिरेगी कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने भी स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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शहर अभियंता की भूमिका पर उठे सवाल, पूछताछ जारी
इस पूरे प्रकरण में शहर अभियंता संजय अग्रवाल के एक पत्र ने नई चर्चा छेड़ दी है, अग्रवाल ने एक पत्र जारी कर दावा किया है कि ठेकेदारों और पार्षदों के बीच कोई मतभेद नहीं है।
एक तरफ पुलिस पार्षदों से पूछताछ कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर अभियंता द्वारा। पार्षदों को क्लीन चिट देने की कोशिश पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
संदेह जताया जा रहा है कि क्या उन पर कोई बड़ा, राजनीतिक दबाव है। संबंधित ठेकेदार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चुप रहने के बजाय उच्च स्तर पर मोर्चा खोला है।
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उसने मामले की शिकायत सीधे नगर निगम आयुक्त और पुलिस आयुक्त व कुंभ मेला मंत्री और मुख्यमंत्री से की थी, जिसके बाद ही प्रशासन और पुलिस हरकत में आए हैं। एक तरफ पुलिसिया जांच और दूसरी तरफ प्रशासनिक लीपापोती ने इस मामले को और अधिक रहस्यमयी बना दिया है।
