उत्तर महाराष्ट्र की प्यास बुझाएगी ‘नदी जोड़ो’ परियोजना, 4,116 करोड़ के काम को मिली रफ्तार
River Linking Project: उत्तर महाराष्ट्र में जलसंकट दूर करने के लिए 4,116 करोड़ की नदी जोड़ो परियोजना का वर्क ऑर्डर जारी हुआ। कोंकण का अतिरिक्त पानी गिरणा बेसिन में लाने के लिए 9 बांध बनेंगे।
- Written By: रूपम सिंह
जलसंकट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nashik River Linking Project: नासिक दशकों से सूखा, अनियमित बारिश और जलसंकट का सामना कर रहे उत्तर महाराष्ट्र के लिए नदी जोड़ो परियोजना नई उम्मीद बनकर सामने आई है। राज्य सरकार के जल संपदा विभाग ने 4,116 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है, जिससे परियोजना के प्रत्यक्ष क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है। गिरणा खोरे परियोजना विभाग, नासिक के माध्यम से यह कार्य मेघा इंजीनियरिंग लि
और आयसीसी इन्फ्राटेक कंपनी के संयुक्त उपक्रम को सौंपा गया है। इस परियोजना से नासिक, जलगांव और धुलिया जिलों की कृषि एवं जलापूर्ति व्यवस्था को दीर्घकालीन मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। नदी जोड़ो परियोजना के तहत कोंकण क्षेत्र में समुद्र में बहने वाले अतिरिक्त वर्षांजल को मोड़कर गिरणा बेसिन तक पहुंचाया जाएगा।
बारिश के पानी को किया जाएगा संचित
सुरगाणा, पेठ और आसपास के नदी क्षेत्रों का पानी विभिन्न बांधों, सुरंगों, पंपिंग स्टेशनों और पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से उत्तर महाराष्ट्र तक लाया जाएगा, परियोजना के अंतर्गत उंबरपाडा, सारन्यावन, प्रतापगढ़, राक्षसभुवन, मिलान्, घोडी, उखेडमाल, सावरपाड़ा और देवमाल सहित 9 स्थानों पर बांध बनाए जाएंगे।
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इसके अलावा माणखेड और सालभोये में बड़े जल संग्रह केंद्र विकसित किए जाएंगे। आधुनिक पंप हाउस, इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम और जलवाहिनी नेटवर्क भी स्थापित किया जाएगा। गिरणा घाटी की ओर पानी मोड़ने के लिए विशेष सुरंगों का निर्माण भी प्रस्तावित है।
कृषि उत्पादन में होगी वृद्धि
परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर महाराष्ट्र के हजारों हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलने की संभावना है। विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को इससे बड़ी राहत मिलेगी और कृषि उत्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट कम होने की भी संभावना व्यक्त की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में इस परियोजना को लेकर पर्यावरणीय मंजूरी, वन क्षेत्र, भूमि अधिग्रहण, आदिवासी क्षेत्रों के पुनर्वास और बढ़ती लागत जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई थी।
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हालांकि राज्य सरकार ने परियोजना को प्राथमिकता देते हुए सभी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर अब काम शुरू करने का निर्णय लिया है। राज्य के जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, घटते भूजल स्तर और बढ़ती जल मांग की पृष्ठभूमि में यह परियोजना केवल सिंचाई योजना नहीं, बल्कि उत्तर महाराष्ट्र की भविष्य की जल सुरक्षा का आधार स्तंभ साबित होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दूरदृष्टि से यह महत्वाकांक्षी परियोजना साकार हो रही है और इससे उत्तर महाराष्ट्र के विकास का नया अध्याय शुरू होगा।
