FDA की स्ट्राइक से हड़कंप: नासिक में दूध संकलन में 2 लाख लीटर की अचानक गिरावट, मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा

FDA Dairy Crackdown: उत्तर महाराष्ट्र में मिलावटखोरी के खिलाफ FDA की सख्ती का असर डेयरी उद्योग पर दिखने लगा है। जून 2026 में नासिक संभाग का दूध संकलन मई की तुलना में करीब 2 लाख लीटर घट गया हैं।
FDA crackdown causes a stir: Milk collection in Nashik drops suddenly by 2 lakh liters; noose tightens on adulterators.
नासिक संभाग, एफडीए, दूध संकलन, मिलावटखोरी,(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Nashik Milk Collection Decline: उत्तर महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा मिलावटखोरी के खिलाफ छेड़े गए सख्त अभियान का असर अब डेयरी उद्योग के आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई देने लगा है। जून 2026 में नासिक संभाग के दूध संकलन में मई की तुलना में लगभग 2 लाख लीटर की अचानक गिरावट दर्ज की गई है, जिसने प्रशासन और डेयरी संचालकों को चौंका दिया है।

संकलन में गिरावट के मुख्य कारण

विशेषज्ञों और डेयरी विकास विभाग के अनुसार, इस गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं मिलावट विरोधी अभियान के डर से अवैध रूप से दूध में मिलावट करने वाले तत्वों और संदेहास्पद डेयरी संचालकों ने अपना कारोबार समेट लिया है या सतर्क हो गए हैं।

मानसून में देरी के कारण मवेशियों को पर्याप्त हरा चारा नहीं मिल पा रहा है, जिसका सीधा असर दूध की उत्पादकता पर पड़ा है। कई किसान डेयरी संघों की तुलना में निजी स्तर पर या स्थानीय विक्रेताओं को दूध बेचना पसंद कर रहे हैं, जहाँ उन्हें बेहतर मूल्य मिल रहा है।

नासिक की आवश्यकता और आपूर्ति का गणित

नासिक जिले की व्यावहारिक दैनिक आवश्यकता लगभग 10 लाख लीटर दूध की है। वर्तमान में सहकारी और निजी डेयरी संघों के माध्यम से 8.5 लाख लीटर दूध प्राप्त हो रहा है, जबकि 2 से 2.5 लाख लीटर दूध असंगठित क्षेत्र (स्थानीय विक्रेताओं) से आता है। दूध संकलन में आई इस कमी के कारण भविष्य में आपूर्ति-मांग के संतुलन पर असर पड़ सकता है।

जून 2026: जिलेवार संकलन का तुलनात्मक ब्यौरा (लीटर में)

जिला मई 2026 संकलन जून 2026 संकलन बदलाव
नासिक 8.18 लाख लीटर 8.22 लाख लीटर +4,000 लीटर
धुले 1.30 लाख लीटर 1.28 लाख लीटर -2,000 लीटर
अहिल्यानगर 42.00 लाख लीटर 40.00 लाख लीटर -2.00 लाख लीटर
नंदुरबार 2.87 लाख लीटर 2.57 लाख लीटर -30,000 लीटर

व्यवसाय के नियमों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि 20 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन और बिक्री करने वाले व्यक्तियों के लिए पंजीकरण और अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के दूध बिक्री का व्यवसाय करना नियमों का उल्लंघन है और प्रशासन इस पर कड़ी निगरानी रख रहा है।

- प्रादेशिक डेयरी, एस. आर. शिपूरकर, विकास अधिकारी

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