

Nashik Village Crematorium Policy: नासिक जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी को देखते हुए, ग्रामीण विकास विभाग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय लिया है। अब जिन गांवों में श्मशान भूमि या शेड की सुविधा नहीं है, वहां अन्य विकास कार्यों के लिए निधि नहीं दी जाएगी।
सरकार की 'गांव वहां श्मशान भूमि' संकल्पना को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जिससे नासिक जिले के करीब 414 गांवों की विकास निधि पर फिलहाल रोक का संकट मंडरा रहा है।
नासिक जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाटों का अभाव किसी त्रासदी से कम नहीं है, विशेषकर आदिवासी बहुल तहसीलों में खुले में अंतिम संस्कारः शेड न होने के कारण बारिश के दिनों में शवदाह के लिए सूखी जगह मिलना भी मुश्किल हो जाता है।
आदिवासी बहुल इलाकों में ग्रामीण बांस पर तिरपाल तानकर या सागौन के पत्तों की पल्ली सिलकर खुले में अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। बाढ़ या भारी बारिश के दौरान कमर तक पानी से गुजरकर शवदाह स्थल तक पहुंचना पड़ता है। गीली लकड़ियों के कारण अग्निदाह में भारी दिक्कतें आती हैं।
अन्य विकास कार्यों को रोककर श्मशान घाटों के निर्माण को अनिवार्य करना यह दर्शाता है कि प्रशासन अब मानवीय और बुनियादी आवश्यकताओं को कागजी विकास से ऊपर रख रहा है। सुरगाणा के हालात न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाते हैं, बल्कि एक बड़े जन-आंदोलन और त्वरित सुधार की मांग भी करते हैं।
प्रशासन ने अब स्थिति की गंभीरता को समझते हुए गांववार समीक्षा शुरू की है। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि जब तक संबंधित गांव में श्मशान घाट और शेड का निर्माण सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक अन्य किसी भी विकास कार्य को मंजूरी या निधि नहीं दी जाएगी। यह नीति इसलिए अपनाई गई है ताकि गांवों में इस बुनियादी जरूरत को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले और किसी को भी अंतिम समय में ऐसी यातना न झेलनी पड़े।