

No Water Day In Nashik To Tackle Water Crisis: शहर के कई हिस्सों में पहले से ही कम दबाव और अपर्याप्त जलापूर्ति के कारण स्थिति खराब थी, वहीं शनिवार 20 जून को महानगरपालिका द्वारा घोषित 'नो वॉटर डे' के कारण नागरिकों को सूखे का सामना करना पड़ा। इस पानी कटौती का सबसे बड़ा झटका झुग्गी-झोपड़ियों के साथ-साथ बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले निवासियों को भी लगा। कई इलाकों में पानी न होने के कारण लोगों को भटकना पड़ा, तो कई लोगों को अपनी जेब ढीली कर निजी कंपनियों से पीने का पानी खरीदना पड़ा।
हालांकि, मनपा का दावा है कि इस कटौती से भविष्य में सुचारू जलापूर्ति में मदद मिलेगी, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की इस देरी से जागी सूझबूझ पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस साल मानसून में हो रही देरी और बांधों के जलस्तर में आई भारी गिरावट को देखते हुए, अगस्त के अंत तक उपलब्ध पानी को चलाने की जिम्मेदारी मनपा पर है। वर्तमान स्थिति के अनुसार 18 दिनों के पानी की कमी है। इसी कमी को पूरा करने के लिए शनिवार 20 जून से हर शनिवार को जलापूर्ति बंद रखने का निर्णय लिया गया है, जिसकी शुरुआत आज से हो गई।
मनपा के जल आपूर्ति विभाग ने नागरिकों को पहले ही सूचित कर आवश्यक भंडारण करने की अपील की थी। लेकिन सिडको, सातपुर, पंचवटी और पुराना नासिक जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ झुग्गी बस्तियों में दो दिनों का पानी जमा करने की सुविधा न होने के कारण नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस बीच, जल आपूर्ति विभाग के अधीक्षक अभियंता रवींद्र धारणकर ने बताया कि रविवार को शहर की जलापूर्ति नियमित और सुचारू कर दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर में रोजाना 600 MLD पानी की आपूर्ति की जाती है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
मनपा द्वारा पानी कटौती लागू किए जाने के बाद कई सोसायटियों ने पानी बचाने की मुहिम शुरू कर दी है। नागरिकों ने खुद पहल करते हुए सोसायटियों में 'पानी संभालकर खर्च करें' के बोर्ड लगाए हैं। गाड़ियों को धोने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। कुछ सोसायटियों ने निजी टैंकर मंगवाकर अपनी जरूरतें पूरी कीं।
एक दिन की पानी कटौती की नौबत इससे पहले साल 2024 में भी आई थी। तब भी मानसून में देरी के कारण सरकार के निर्देशानुसार जून के आखिरी हफ्ते में हफ्ते में एक दिन पानी बंद किया गया था। दो सप्ताह तक यह प्रयोग चला और जुलाई में भारी बारिश के बाद इसे वापस ले लिया गया था। संयोग से, इस शनिवार को भी जैसे ही कटौती शुरू हुई, दोपहर बाद शहर के कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश दर्ज की गई।
साल 2015-16 के सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान भी बारिश न होने से अभूतपूर्व जल संकट पैदा हो गया था। तब मनपा ने अक्टूबर के बाद ही पानी में कटौती का फैसला लिया था और 500 MLD के बजाय केवल 350 MLD पानी की आपूर्ति की जा रही थी। अब 12 साल बाद एक बार फिर आगामी सिंहस्थ महाकुंभ के मुहाने पर शहर के सामने वैसा ही संकट आ खड़ा हुआ है।
वरिष्ठ पार्षद गुरुमीत बग्गा ने कहा कि शहर पर पहले भी तीन-चार बार भीषण जल संकट आ चुका है। एक साल तो ऐसी स्थिति थी कि इंद्रकुंड से टैंकरों द्वारा पानी लाकर रामकुंड में डालना पड़ा था। अमूमन गंगापुर बांध के जलग्रहण क्षेत्र में इतनी बारिश हो ही जाती है कि पीने के पानी की समस्या हल हो जाए। मुख्य सवाल इस साल का है। इसके लिए शहर के विधायकों को सरकार से अनुरोध करना होगा कि जायकवाड़ी बांध के लिए छोड़ा जाने वाला पानी रोका जाए। ऐसा करने पर कम बारिश होने के बावजूद नासिक वासियों के पानी को जायकवाड़ी के लिए छोड़ने की नौबत नहीं आएगी।