

NCP Internal Conflict On Rajya Sabha Seat: राज्यसभा की एक सीट के लिए मंत्री छगन भुजबल का नाम लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन ऐन वक्त पर राजेंद्र जैन की उम्मीदवारी घोषित होने से येवला विधानसभा क्षेत्र सहित राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नाराज़गी का माहौल बन गया है। पिछले कई दिनों से भुजबल के राज्यसभा जाने की चर्चाएं चल रही थीं। इससे स्थानीय राजनीति में बड़े बदलाव होने की उम्मीद जताई जा रही थी।
हालांकि अंतिम निर्णय अलग होने से कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। राष्ट्रवादी के कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा थी कि यदि छगन भुजबल राज्यसभा जाते हैं तो मंत्री पद रिक्त होने पर समीर भुजबल को अवसर मिल सकता है। समीर भुजबल ने भी पिछले कुछ महीनों में येवला विधानसभा क्षेत्र में अपना जनसंपर्क बढ़ाया था। विभिन्न कार्यक्रमों, बैठकों और स्थानीय मुद्दों पर उनकी सक्रियता के कारण उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर भी उत्सुकता बढ़ गई थी।
इस बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि समीर भुजबल को मंत्री पद दिए जाने के प्रस्ताव को भाजपा की ओर से समर्थन नहीं मिला। हालांकि इस पर राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि महायुति सरकार में किसी दल के हिस्से का मंत्री पद रिक्त होने पर उस पद पर किसे अवसर देना है, यह निर्णय संबंधित दल का अधिकार होता है। ऐसे में राष्ट्रवादी के हिस्से के पद को लेकर किसी दूसरे दल की भूमिका निर्णायक कैसे हो सकती है, यह सवाल कार्यकर्ताओं द्वारा उठाया जा रहा है।
कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि राज्यसभा उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में पर्दे के पीछे अलग तरह के राजनीतिक समीकरण काम कर रहे थे। इसी कारण अंतिम समय में उम्मीदवार के नाम में बदलाव किया गया। इस निर्णय से येवला क्षेत्र के राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं में असमंजस और असंतोष का माहौल पैदा हो गया है तथा कई कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी नाराज़गी व्यक्त की है।
छगन भुजबल के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के चलते येवला में भविष्य में उपचुनाव होने की संभावना भी जताई जा रही थी। ऐसी स्थिति में भुजबल समर्थकों और दराडे गुट के बीच सीधा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता था। स्थानीय राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई थी। लेकिन राज्यसभा उम्मीदवारी के निर्णय के बाद इन सभी अटकलों पर विराम लग गया है।
छगन भुजबल ने इन घटनाक्रमों को लेकर किसी भी प्रकार की नाराज़गी से इनकार किया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्णय को स्वीकार करने की बात कही है, लेकिन उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल बना हुआ है।
येवला क्षेत्र के अनेक कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि भुजबल के राज्यसभा जाने से स्थानीय नेतृत्व को आगे आने का अवसर मिलेगा। यही कारण है कि अंतिम निर्णय के बाद कार्यकर्ताओं की नाराज़गी और अधिक बढ़ती दिखाई दे रही है।