तपते नासिक में पानी का अकाल, 40 डिग्री तापमान ने सुखाए गले, 149 बस्तियों में टैंकरों का पहरा

Nashik Water Crisis: नासिक जिले में भीषण गर्मी के कारण 149 गांवों और बस्तियों में पानी की भारी किल्लत। प्रशासन ने 52 टैंकर तैनात किए हैं, येवला और मालेगांव सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र।
Scorching Nashik faces water shortage, 40-degree temperatures parch throats, tankers patrol 149 settlements
पानी के टैंकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nashik Water Crisis 2026: पूरे महाराष्ट्र के साथ-साथ नासिक जिले में भी भीषण गर्मी का प्रकोप अब जानलेवा साबित हो रहा है। अप्रैल के मध्य में ही पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को छूने लगा है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत बेहद गंभीर हो गई है। जिले के आधे से अधिक हिस्से में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो गई है, जिसके चलते वर्तमान में 149 गांवों और बस्तियों की प्यास बुझाने के लिए प्रशासन को पूरी ताकत लगानी पड़ रही है।

पिछले साल का रिकॉर्ड टूटा

बढ़ते तापमान और भीषण लू के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की मांग में भारी उछाल आया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में जिले के 7 प्रमुख तालुकों के 46 गांवों और 103 बस्तियों की लगभग 87,304 की आबादी अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर है। प्रशासन द्वारा तैनात 52 टैंकर प्रतिदिन कुल 95 चक्कर लगाकर जलापूर्ति करने की कोशिश कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले वर्ष इसी अवधि में केवल 30 टैंकरों की आवश्यकता थी, जो इस बार लगभग दोगुनी हो गई है।

येवला और मालेगांव की स्थिति सबसे चिंताजनक

नासिक जिले के अलग-अलग तहसीलों में जल संकट की तीव्रता अलग-अलग है, लेकिन येवला इस समय सबसे अधिक प्रभावित है। यहाँ सर्वाधिक 19 टैंकरों के माध्यम से 34 गांवों और बस्तियों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। वहीं, मालेगांव में जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए रिकॉर्ड 9 निजी कुओं का अधिग्रहण किया है। इगतपुरी में 11 टैंकर तैनात हैं, जबकि पेठ, सिन्नर, चांदवड और देवला तहसीलों में भी स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है।

आगामी संकट की चेतावनी

प्रशासनिक अधिकारियों का अनुमान है कि यदि तापमान में गिरावट नहीं आई, तो अप्रैल के अंत तक टैंकरों की संख्या 75 के आंकड़े को पार कर सकती है। वर्तमान में स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने कुल 19 निजी कुओं का अधिग्रहण किया है ताकि टैंकरों के लिए पानी के स्थायी स्रोत उपलब्ध रहें। प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों तक जलापूर्ति किसी भी हाल में बाधित न हो।

नासिक के ग्रामीण इलाकों में पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष जारी है। जल संकट की यह भयावहता न केवल वर्तमान प्रबंधन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि भविष्य के लिए जल संरक्षण की तात्कालिक आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

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