

Nashik Court News: बहुराष्ट्रीय कंपनी टीसीएस में कार्यरत हिंदू कर्मचारी को जबरन टोपी पहनाने और मांसाहार के लिए विवश कर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में नासिकरोड जिला अदालत ने आरोपी दानिश शेख की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह प्रतीत होता है कि आरोपी ने पीड़ित के धर्म और आस्था का अपमान करने के उद्देश्य से जानबूझकर और द्वेषपूर्ण कृत्य किया है।
पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे उसकी धार्मिक भावनाओं को गहरी चोट पहुंची है। कंपनी में उत्पीड़न के इस बड़े मामले में देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में 1 और मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में 8, यानी कुल 9 मामले दर्ज हैं। फरार संदिग्ध निदा खान की अग्रिम जमानत पर 27 को सुनवाई होगी। गर्भवती होने के बावजूद आरोपों की गंभीरता के कारण उसे अब तक कोई संरक्षण नहीं मिला है। अपराध संख्या 166 में दानिश की जमानत अर्जी पर अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी।
बलात्कार, छेड़छाड़ और धार्मिक भावनाएं भड़काने के मामले में दानिश और तौसिफ की जमानत पर 2 मई को सुनवाई निर्धारित है। आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि संबंधित धाराओं में सजा 7 साल से कम है और दानिश का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक उपसंचालक किरण बेंडभर ने इसका पुरजोर विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपियों पर बलात्कार और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया है और राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस पर संज्ञान लिया है। शिकायत के अनुसार, पीड़ित को जबरन धार्मिक ग्रंथ पढ़ने, मांस खाने और धर्मांतरण के लिए उकसाया गया। साथ ही, वरिष्ठों को झूठी रिपोर्ट भेजकर कर्मचारी का मानसिक उत्पीड़न किया गया। वर्तमान में दानिश शेख, आसिफ अंसारी, तौसिफ अत्तार, शाहरुख कुरैशी, रज़ा मेमन, शफी शेख और एजीएम अश्विनी चैनानी नासिकरोड जेल में बंद हैं। अब सभी की निगाहें इन आरोपियों की जमानत पर आने वाले अदालती फैसलों पर टिकी हैं।