

Nashik Smart Parking Project Delay: नासिक शहर की ट्रैफिक समस्या को दूर करने के लिए प्रस्तावित स्मार्ट पार्किंग परियोजना पिछले छह महीनों से अधर में लटकी हुई है। मनपा द्वारा बार-बार टेंडर निकालने के बावजूद, तकनीकी शर्तों को पूरा करने वाली कोई भी संस्था नहीं मिल पा रही है।
अब मनपा पांचवीं बार फेर-टेंडर करने की तैयारी में है। मनपा ने चौथे टेंडर में भाग लेने वाली सभी चार संस्थाओं को तकनीकी रूप से अपात्र घोषित कर दिया है।
इसके पीछे मुख्य कारण 'अनुभव' की एक खास शर्त है, नियम के अनुसार, टेंडर में शामिल होने वाली कंपनी के पास पार्किंग चलाने और सड़क से वाहन उठाकर 1.5 करोड़ रुपये की वसूली करने का पिछला अनुभव होना अनिवार्य है।
फिलहाल किसी भी स्थानीय या इच्छुक संस्था के पास इतना बड़ा टर्नओवर या विशिष्ट अनुभव नहीं मिल रहा है, जिसके कारण वे तकनीकी दौर में ही बाहर हो जा रही हैं।
यातायात की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नासिक के पूर्व और पश्चिम विभाग में प्रायोगिक आधार पर यह योजना लागू होनी है। 6 वर्ग किलोमीटर के दायरे में कुल 4,155 वाहनों के लिए जगह सुनिश्चित की गई है, ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए मनपा ने मासिक रॉयल्टी को 35 लाख रुपये से घटाकर अब मात्र 13 लाख रुपये कर दिया है। ठेकेदार की 'नो पार्किंग' में खड़े वाहनों को उठाने का अधिकार होगा, जिसके लिए 700 से 1,150 रुपये तक का शुल्क तय किया गया है।
प्रस्तावित स्पॉट: 22 ऑन-स्ट्रीट और 6 ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग।
पार्किंग दर: दोपहिया (10-60 रु.) और चौपहिया (20-100 रु.) प्रति घंटा।
वर्तमान स्थितिः चार बार टेंडर प्रक्रिया विफल, पांचवी बार की तैयारी, मुख्य चाचा 1.5 करोड़ रुपये की वसूली के अनुभव वाली शर्त।