

नासिक में सिंहस्थ रिंग रोड से प्रभावित किसानों की शिकायतों पर जिला प्रशासन ने लिया संज्ञान।
कुछ गांवों में सीधे खरीद प्रक्रिया से जमीन अधिग्रहण करने के निर्देश।
15 गांवों के 188 किसानों ने सिंचित जमीन को गैर-कृषि दर्ज करने की शिकायत की।
जमीनों के वर्गीकरण की जांच के लिए संयुक्त टीम मौके पर करेगी निरीक्षण।
सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
Nashik Ring Road Simhastha Kumbh Farmers Compensation: नासिक में सिंहस्थ कुंभ के लिए प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना से प्रभावित किसानों की शिकायतों पर जिला प्रशासन ने दो अहम निर्देश दिए हैं। कुछ गांवों में सीधे खरीद से भूमि अधिग्रहण करने और सिंचित जमीनों के रिकॉर्ड की संयुक्त जांच करने को कहा गया है। 188 किसानों ने अपनी सिंचित जमीन को बिना सहमति गैर-कृषि दर्ज किए जाने की शिकायत की थी।
नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना से प्रभावित किसानों की शिकायतों पर जिला प्रशासन ने कदम उठाया है। भूमि अधिग्रहण में सीधे खरीद का विकल्प उपलब्ध कराने और सिंचित जमीनों के रिकॉर्ड की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे प्रभावित किसानों को अधिक मुआवजा मिलने की संभावना बन सकती है, हालांकि अंतिम राहत संबंधित प्रक्रिया और सत्यापन पर निर्भर करेगी।
जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने महाराष्ट्र राज्य अवसंरचना विकास निगम को निर्देश दिया है कि जिन गांवों में भूमि अधिग्रहण के अंतिम निर्णय घोषित नहीं हुए हैं और जिनके लिए निधि प्राप्त नहीं हुई है, वहां किसानों की मांग के अनुसार सीधे खरीद प्रक्रिया के जरिए जमीन अधिग्रहित करने के विकल्प पर कार्रवाई की जाए।
रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजे की राशि और जमीन के वर्गीकरण को लेकर किसानों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रभावित किसानों का कहना है कि सिंचित जमीनों को रिकॉर्ड में गैर-कृषि दर्ज किए जाने से मुआवजे पर असर पड़ सकता है।
परियोजना से प्रभावित 15 गांवों के किसानों की ओर से दिए गए ज्ञापनों में से 188 किसानों ने शिकायत की कि उनकी सिंचित जमीन को उनकी सहमति के बिना गैर-कृषि दर्ज कर दिया गया है। इस शिकायत के बाद जमीनों के वास्तविक वर्गीकरण की जांच का निर्णय लिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी ने नासिक तहसीलदार और अपर तहसीलदार को पत्र जारी किया है। जिलाधिकारी आयुष प्रसाद के निर्देशों के अनुसार, तालुका कृषि अधिकारी और ग्राम राजस्व अधिकारी की संयुक्त टीम मौके पर जाकर जमीनों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेगी।
टीम को जमीनों के वर्गीकरण और संबंधित रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, सिंचित जमीनों के रिकॉर्ड में बदलाव किए बिना उनकी मूल स्थिति बनाए रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
अब सीधे खरीद की प्रक्रिया और संयुक्त निरीक्षण की रिपोर्ट के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। किसानों को उम्मीद है कि जमीनों के वास्तविक वर्गीकरण की पुष्टि होने पर मुआवजे से जुड़े विवादों के समाधान में मदद मिलेगी। प्रशासनिक निर्देशों का जमीनी स्तर पर किस तरह क्रियान्वयन होता है, इस पर प्रभावित किसानों की नजरें टिकी हैं।