

सूखाग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों की निगरानी के लिए जिलास्तरीय समिति गठित।
अधिकृत सरकारी और निजी टैंकरों पर GPS उपकरण लगाना अनिवार्य।
प्रतिदिन कम से कम 5% टैंकरों का होगा औचक निरीक्षण।
GPS लॉग और पानी की खेप के रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही भुगतान।
अक्टूबर 2026 से जून 2027 तक के लिए जारी किए गए निर्देश।
Chhatrapati Sambhajinagar Drought Management Tanker Inspection Gps: छत्रपति संभाजीनगर जिले में सूखाग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों से होने वाली जलापूर्ति की निगरानी के लिए जिलास्तरीय समिति गठित की गई है। GPS ट्रैकिंग, रोजाना कम से कम 5% टैंकरों के औचक निरीक्षण और रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद भुगतान की व्यवस्था लागू की जाएगी।
छत्रपति संभाजीनगर, ब्यूरो। जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों के जरिए होने वाली जलापूर्ति पर अब GPS के माध्यम से नजर रखी जाएगी। पानी की आपूर्ति में पारदर्शिता बनाए रखने और अनावश्यक परिवहन खर्च पर रोक लगाने के लिए जिलाधिकारी विनय गौड़ा जीसी ने अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिलास्तरीय जल टैंकर निगरानी एवं प्रत्यक्ष निरीक्षण समिति गठित की है।
अक्टूबर 2026 से जून 2027 तक प्रभावी आदेश में टैंकरों की आवाजाही, पानी की मात्रा, निर्धारित फेरों और जलस्रोतों की निगरानी के लिए विस्तृत व्यवस्था तय की गई है।
जिले में संचालित कुल टैंकरों में से प्रतिदिन कम से कम 5 प्रतिशत का औचक निरीक्षण किया जाएगा। संबंधित अधिकारी टैंकरों से जलापूर्ति वाले गांवों का दौरा कर यह जांच करेंगे कि पानी निर्धारित जलस्रोत से भरा गया है या नहीं और गांव तक तय मात्रा में पहुंचा या नहीं।
निरीक्षण के दौरान जलस्रोतों, निर्धारित फेरों और वास्तव में पहुंचाए गए पानी का सत्यापन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के कुओं और अन्य जलस्रोतों के अधिग्रहण से संबंधित रिकॉर्ड तथा ग्राम पंचायत स्तर पर रखे जाने वाले टैंकर रजिस्टर की भी जांच होगी।
सभी अधिकृत सरकारी और निजी टैंकरों पर GPS ट्रैकिंग उपकरण लगाना अनिवार्य होगा। GPS लॉग में दर्ज फेरों की संख्या और टैंकर में पानी भरने के स्थान से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान करने के बाद ही भुगतान किया जाएगा।
टैंकर चालक के साथ ग्राम पंचायत अधिकारी या ग्राम राजस्व अधिकारी के पास डिजिटल खेप रजिस्टर रहेगा। टैंकर के गांव पहुंचने पर समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर लेकर पानी की खेप दर्ज की जाएगी। टैंकर भरने के स्थान और जलसंकटग्रस्त गांव के बीच की दूरी Google Maps या GPS की सहायता से मापकर रिकॉर्ड में दर्ज की जाएगी।
निर्धारित मानकों से अधिक दूरी वाले जलस्रोतों का चयन कर परिवहन खर्च बढ़ाने की स्थिति में, आवश्यक दूरी प्रमाण-पत्र के अभाव सहित संबंधित अनियमितताओं पर प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकेगी।
टैंकर से जलापूर्ति की मंजूरी देने से पहले गांव या बस्ती की वास्तविक आबादी के आधार पर पानी की जरूरत तय की जाएगी। टैंकर की क्षमता, निर्धारित फेरों और गांव की आवश्यकता के अनुसार पानी की खेप निर्धारित होगी।
सार्वजनिक जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता समाप्त होने की पुष्टि किए बिना टैंकर मंजूर नहीं किया जाएगा। इसके लिए ग्राम पंचायत का प्रस्ताव और संयुक्त पंचनामा आवश्यक होगा। पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच के साथ सार्वजनिक जल वितरण टंकियों की समय पर सफाई और विसंक्रमण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आदेश में भूजल अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के अनुसार सार्वजनिक पेयजल स्रोतों के 50 मीटर के भीतर अन्य उपयोगों के लिए कुआं खोदने और एक किलोमीटर के दायरे में जल निकासी पर प्रतिबंध का भी उल्लेख है।
प्रशासन का उद्देश्य संभावित जलसंकट के दौरान जलापूर्ति की निगरानी मजबूत करना, पानी की वास्तविक जरूरत के अनुसार टैंकर उपलब्ध कराना और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना है।