Manikrao Kokate: बच गई कृषि मंत्री की कुर्सी, नासिक सत्र न्यायालय ने माणिकराव कोकाटे की सजा पर लगाई रोक
Manikrao Kokate: सोमवार को नासिक सत्र न्यायालय ने महाराष्ट्र के मंत्री माणिकराव कोकाटे बड़ी राहत दी है। सत्र न्यायालय ने जिला अदालत के दो साल की सजा वाले फैसले पर रोक लगा दी है।
- Written By: आकाश मसने
माणिकराव कोकाटे (सोर्स: सोशल मीडिया)
नासिक: महायुति सरकार में कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे की कुर्सी पर लगा ग्रहण हट गया है। सोमवार को नासिक सत्र न्यायालय ने जिला कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें कोकाटे को 2 साल की जेल व 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। 20 फरवरी को नासिक जिला कोर्ट ने फ्लैट हासिल करने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी करने के मामले में कोकाटे व उनके भाई को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई थी।
इस सजा के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने माणिकराव कोकाटे की विधायकी को रद्द करने की मांग शुरू कर दी थी लेकिन सत्र न्यायालय ने सजा पर रोक लगाने के अलावा 1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर मंत्री कोकाटे को जमानत भी दे दी।
मंगलवार को आएगा विधायकी पर फैसला
नासिक कोर्ट के इस फैसले से अजित पवार गुट के मंत्री को बड़ी राहत मिल गई है। हालांकि उनकी विधायकी के बारे में विधानसभा से मंगलवार को फैसला आएगा। इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। इस फैसले से तय होगा कि कोकाटे की कृषि मंत्री की कुर्सी बचती है या फिर उन्हें कैबिनेट से बाहर जाना होगा।
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क्या है प्रावधान?
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के मुताबिक अगर सांसदों और विधायकों को किसी भी मामले में 2 साल से ज्यादा की सजा हुई है तो ऐसे में उनकी सदस्यता (संसद और विधानसभा से) रद्द हो जाएगी। नासिक जिला कोर्ट के फैसले के बाद विपक्षी दलों ने कृषि मंत्री कोकाटे पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा दिया था।
महाराष्ट्र के विपक्षी दलों का कहना था कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी व महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री सुनील केदार के खिलाफ कोर्ट का फैसला आने के 24 घंटे के भीतर उनकी संसदी व विधायकी रद्द कर दी गई थी लेकिन कोकाटे को क्यों बचाया जा रहा है।
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महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा था कि वे कोर्ट के फैसले की कॉपी मिलने के बाद उचित फैसला लेंगे। अब नासिक सत्र न्यायालय के फैसले से पूरे मामले में नया ट्विस्ट आ गया है।
क्या है मामला
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री माणिकराव कोकाटे के खिलाफ धोखाधड़ी का यह मामला साल 1995 का है। पूर्व मंत्री तुकाराम दिघोले ने कोकाटे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने झूठे दस्तावेज पेश कर कम आय वाले लोगों के लिए आरक्षित फ्लैट को हासिल किया है।
