

Nashik Infrastructure Project: नासिक पंचवटी के आरटीओ कॉर्नर से रासबिहारी होते हुए सीधे छत्रपति संभाजीनगर राजमार्ग को जोड़ने वाली महत्त्वपूर्ण सड़क परियोजना अब राजनीति की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
लगभग 9 किलोमीटर लंबी इस सड़क का चौड़ीकरण कार्य स्थानीय पार्षदों ने एकजुट होकर बंद करवा दिया है। पिछले 8 दिनों से काम ठप होने के कारण 129 करोड़ 34 लाख रुपये की यह महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटक गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की दृष्टि से यह सड़क नासिक के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। पेठ और सूरत की ओर से आने वाले भारी वाहनों को शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में लाए बिना सीधे रासबिहारी चौक के रास्ते बाहर भेजने के लिए इस मार्ग का निर्माण अनिवार्य है।
आरटीओ कॉर्नर से मेरी म्हसरूल मार्ग पर रिहायशी बस्तियों और बढ़ती भीड़ के कारण अक्सर हादसे होते रहते हैं। सड़क चौड़ीकरण से इन दुर्घटनाओं पर लगाम लगने की उम्मीद है।
वार्ड संख्या 1 से 5 के पार्षदों ने काम रुकवाने के पीछे ठेकेदार की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया है। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं, ठेकेदार ने काम शुरू करते समय भूमिगत गटर, गैस पाइपलाइन और पेयजल के नल कनेक्शनों की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा, जिससे कई बस्तियों में नागरिक सुविधाएं उप हो गई हैं। पार्षदों का कहना है कि जिस परियोजना के लिए उन्होंने मंत्रियों के चक्कर काटकर मंजूरी दिलाई, उसे ठेकेदार ने उन्हें विश्वास में लिए बिना शुरू कर दिया। स्थानीय नेताओं में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि बिना किसी औपचारिक भूमिपूजन या सूचना के मनमाने ढंग से खुदाई शुरू कर दी गई।
इस पूरे मामले ने अब राज्य स्तर पर राजनीतिक रंग ले लिया है। पिछले सप्ताह मुंबई में हुई सिंहस्थ कुंभ मेले की उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त तेवर अपनाए है, सीधे मामला दर्ज करने का आदेश मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि विकास कार्यों में बाधा डालने वालों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि संबंधित ठेकेदार के रसूखदार संबंधी के कारण ही यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा है और उन्हीं के इशारे पर यह कड़ी चेतावनी दी गई है।
फिलहाल, ठेकेदार द्वारा सिंहस्थ प्राधिकरण से शिकायत करने और राजनीतिक दबाव बनाने के बावजूद। सड़क पर मशीने शांत है। जब तक जनप्रतिनिधियों और ठेकेदार के बीच 'ईगी' और 'विकास' की यह लड़ाई खत्म नहीं होती, तब तक रासबिहारी मार्ग का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है।