नासिक रिंग रोड: 13 गांवों में जमीन की पैमाइश का विरोध, ‘परिक्रमा मार्ग’ के भूमि अधिग्रहण में फंसा पेंच

Nashik Ring Road Project: नासिक में प्रस्तावित 66 किमी रिंग रोड परियोजना के लिए जमीन की पैमाइश को 13 गांवों के किसानों का विरोध, भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी है।
Kumbh Mela traffic planning
farmers protest Nashik land survey (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nashik Land Acquisition Protest: आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले के मद्देनजर शहर में यातायात को सुचारू बनाने के लिए प्रस्तावित बाह्य रिंग रोड परियोजना को स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ रहा है। रिंग रोड के दायरे में आने वाले 25 गांवों में से 13 गांवों के किसानों ने जमीन की पैमाइश का कड़ा विरोध किया है, जिसके कारण इन क्षेत्रों में काम ठप पड़ा है।

प्रशासन का अनुमान है कि 2015 के कुंभ मेले की तुलना में इस बार पांच गुना अधिक श्रद्धालु नासिक और त्र्यंबकेश्वर पहुंचेंगे। भीड़ और संभावित ट्रैफिक जाम से बचने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 66 किलोमीटर लंबे इस रिंग रोड के निर्माण का निर्णय लिया है। इस परियोजना के लिए जिला प्रशासन को लगभग 1200 किसानों की 365 हेक्टेयर निजी भूमि की आवश्यकता है।

अभी तक भूमि मापन का प्रस्ताव पारित नहीं

प्रशासन सीधी खरीद नीति के तहत 25 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे का विकल्प दे रहा है, लेकिन किसान इसे अपर्याप्त मान रहे हैं। कई भू-स्वामियों ने मांग की है कि सड़क के नक्शे में बदलाव किया जाए, ताकि उनके घर और कुएं सुरक्षित रह सकें। इसी विरोध के चलते देवलाली, आडगांव, विंचूरगवली, बेलगांव ढगा, विहितगांव और गोवर्धन जैसे गांवों में अब तक सर्वेक्षण शुरू नहीं हो सका है। मखमलाबाद में भी काम अधूरा है, जबकि सारुल और राजूर बहुला की ग्राम पंचायतों ने अभी तक भूमि मापन का प्रस्ताव पारित नहीं किया है।

16 फरवरी से मातोरी गांव में पैमाइश का कार्य शुरू

विरोध के बीच कुछ क्षेत्रों में सकारात्मक रुख भी देखने को मिला है। ढकांबे, मानोरी, वरवंडी, पाथर्डी, पंचक और गौलाणे जैसे गांवों के किसानों ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग दिया है। राजस्व विभाग ने माडसांगवी में सर्वाधिक 87 और पाथर्डी में 33 गुटों की पैमाइश पूरी कर ली है। जिला प्रशासन के अनुसार, सोमवार 16 फरवरी से मातोरी गांव में पैमाइश का कार्य शुरू किया जा रहा है।

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