AI in Government Work Nashik: सरकार बनी स्मार्ट, अब एआई (AI) निपटाएगा सरकारी फाइलें, फाइलों की धूल का खेल खत्म

AI in Government Work: अपर मुख्य सचिव विकास खारगे ने नासिक में ई-ऑफिस और AI के उपयोग के निर्देश दिए। महाराजस्व अभियान के दूसरे चरण से शहरी नागरिकों को मिलेगी राहत। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
AI in Government Work, Nashik: The Government Goes Smart—Now AI Will Process Government Files, Putting an End to the 'Dusty File' Saga.
एआई की प्रतीकात्मक फोटो ( सोर्स: सोशल मीडिया)
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AI in Government Work News: सरकारी दफ्तरों में लंबित फाइलों और बाबूराज से परेशान होने वाले नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव विकास खारगे ने नासिक जिलाधिकारी कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि अब सरकारी सेवाओं को त्वरित और पारदर्शी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा। उनका लक्ष्य नागरिकों को दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति दिलाना और डिजिटल गवर्नेंस को अगले स्तर पर ले जाना है।

ई-ऑफिस और महाराजस्व अभियान

बैठक के दौरान विकास खारगे ने अधिकारियों को 'ई-ऑफिस' प्रणाली को शत-प्रतिशत लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से न केवल फाइलों का निपटारा तेज होगा, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। छत्रपति शिवाजी महाराज महाराजस्व अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे एक ही छत के नीचे सेवाएं मिलने से ग्रामीणों के समय और पैसे की बचत हो रही है। इस अभियान की सफलता को देखते हुए, अगले तीन महीनों में इसका दूसरा चरण शुरू किया जाएगा, जिसका मुख्य केंद्र शहरी क्षेत्र होंगे।

एग्रीस्टैक और वन अधिकार

नासिक जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजीत इस समीक्षा बैठक में केवल फाइलों पर ही नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव ने ई-फसल निरीक्षण (e-Peek Pahani) और एग्रीस्टैक पंजीकरण में तेजी लाने को कहा ताकि किसानों को सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। इसके साथ ही पाणंद सड़कें, फेरफार प्रविष्टियां, महापार पोर्टल और वन अधिकार दावों की भी बारीकी से समीक्षा की गई। इन सभी प्रक्रियाओं में एआई और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है ताकि त्रुटियों की संभावना कम हो सके।

अधिकारियों को सख्त हिदायत

विकास खारगे ने विभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तहसीलदारों को चेतावनी दी कि नागरिकों के आवेदनों में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी काम पारदर्शी तरीके से और एक निश्चित समय सीमा (Time-bound) के भीतर होने चाहिए। शहरी क्षेत्रों में अभियान का दूसरा चरण विशेष रूप से भवन निर्माण और शहरी राजस्व से जुड़े लंबित मामलों को सुलझाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे रियल एस्टेट और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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