

Nashik Reservation Protest: बंद करो बंद करो, आरक्षण का विभाजन बंद करो और आरक्षण हमारे हक का, नहीं किसी के बाप का के गगनभेदी नारों के साथ शनिवार 22 अगस्त को आरक्षण उपवर्गीकरण विरोधी संघर्ष समिति की ओर से विशाल एल्गार महामोर्चा निकाला गया। इस मोर्चे के माध्यम से महाराष्ट्र में अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण (सब-कैटेगराइजेशन) के फैसले का कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
59 जाति समूहों को एक साथ लेकर यह महामोर्चा गोल्फ क्लब और ईदगाह मैदान से सीबीएस स्थित डॉ. बी. आर. आंबेडकर की प्रतिमा तक निकाला गया। सुबह 10 बजे से ही ईदगाह मैदान में नागरिकों का जुटना शुरू हो गया था, जिसके बाद दोपहर 12 बजे मोर्चे की शुरुआत हुई।
इस प्रदर्शन में महिलाओं की भागीदारी भी काफी उल्लेखनीय रही। त्र्यंबक नाका, कालिदास नाट्यगृह और शालीमार मार्ग से होता हुआ मोर्चा आंबेडकर प्रतिमा के पास पहुंचा, जहां यह एक विशाल सभा में तब्दील हो गया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि डॉ. बाबासाहब आंबेडकर ने गोलमेज सम्मेलन में 59 जातियों का प्रतिनिधित्व किया था और हमें स्वाभिमान से जीना सिखाया।
आरोप लगाया गया कि महाराष्ट्र सरकार उपवर्गीकरण के बहाने जातियों के बीच आपसी विवाद पैदा कर अनुसूचित जातियों के आरक्षण को समाप्त करने की साजिश रच रही है, जिसे कभी सफल नहीं होने दिया जाएगा। संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उपवर्गीकरण का यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो आने वाले समय में सीधे राज्य मंत्रालय पर मोर्चा निकाला जाएगा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में संविधान का सम्मान करो, दलित समाज का संकल्प, उपवर्गीकरण का विरोध और समाज में फूट डालना बंद करो" जैसी तख्तियां मौजूद थीं।
समिति ने न्यायमूर्ति बदर समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या राज्य की सभी 59 जातियों के प्रतिनिधियों को समान अवसर देकर उनकी बात सुनी गई और क्या उनका सामाजिक व आर्थिक अध्ययन किया गया? इस महामोर्चे में समिति के अध्यक्ष प्रकाश पगारे, उपाध्यक्ष किशोर गांगुर्डे, नगरसेवक राहुल दिवे, कार्याध्यक्ष सनी रोकडे, पूर्व न्यायाधीश अनिल वैद्य, महिला अध्यक्ष कविता पवार, अनिल गांगुर्डे, कुणाल वाघ, कांचन जाधव और बालासाहेब शिंदे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।