क्या SC आरक्षण को टुकड़ों में बांट रही है सरकार? नितिन राउत ने अनंत बदर समिति की रिपोर्ट पर उठाए गंभीर सवाल

Nitin Raut Demands: नितिन राउत का आरोप: SC उप-वर्गीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं। अनंत बदर समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जातिवार जनगणना की मांग को लेकर मुख्य सचिव को पत्र।
Nitin Raut terms SC sub-classification process 'anti-democratic'. Demands immediate release of Justice Anant Badar report and a 60-day window for objections.
नितिन राउत (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Nitin Raut SC Sub-classification: राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जातियों (SC) के उप-वर्गीकरण को लेकर चल रही प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। यह आरोप पूर्व ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने लगाया। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति अनंत बदर समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक किए बिना उस पर केवल 5 दिनों में अभिमत मांगना संदिग्ध है।

रिपोर्ट की जानकारी ही न होने पर जनता आपत्तियां कैसे दर्ज कर सकेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. बाबासाहब आंबेडकर जयंती उत्सव के दौरान यह प्रक्रिया चलाकर समाज को अपनी राय रखने से वंचित करने का प्रयास सरकार कर रही है। यह लोकतंत्र विरोधी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार उप-वर्गीकरण के लिए इम्पिरिकल डाटा आवश्यक है। सरकार ने अब तक कोई जातिवार शैक्षणिक या नौकरी संबंधी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।

सभी क्षेत्रों में लागू हो वर्गीकरण

नितिन राउत ने कहा कि यदि सरकार उप-वर्गीकरण पर अड़ी है, तो इसे केवल नौकरियों तक सीमित न रखकर राजनीतिक क्षेत्र, उच्च शिक्षा, विदेश छात्रवृत्ति तथा अर्ध-सरकारी संस्थाओं में भी जनसंख्या के अनुपात में लागू किया जाए। उन्होंने मांग रखी है कि उप-वर्गीकरण से पहले पूरे महाराष्ट्र की जातिवार जनगणना कर सटीक अनुपात तय किया जाए। ‘अ-ब-क-ड’ वर्गीकरण का आधार बनने वाले आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।

दो टुकड़ों में बांटा जा रहा आरक्षण

सफाईकर्मियों एवं वंशानुगत नौकरी में फंसे समाजबंधुओं के लिए विशेष शैक्षणिक पैकेज घोषित किया जाए। समाज को अपना पक्ष रखने के लिए कम से कम 60 दिनों का समय दिया जाए। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक सुविधा के लिए और आरक्षण को टुकड़ों में बांटकर ‘शून्य का विभाजन’ करने हेतु सरकार जल्दबाजी में निर्णय न ले। इससे अनुसूचित जातियों के भीतर एकता को नुकसान पहुंचेगा।

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