

Nashik PM E Buses Stuck Charging Station: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों पिछले 28 अगस्त को नासिक महानगरपालिका की 50 अत्याधुनिक 'PM ई-बसों' का बड़े धूमधाम से लोकार्पण किया गया था। लोकार्पण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने इस पर्यावरण-अनुकूल बस सेवा की खुले दिल से सराहना की थी।
हालांकि, इस बहुचर्चित लोकार्पण को दो सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद नासिक शहर की किसी भी सड़क पर ये इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती हुई नजर नहीं आ रही हैं, जिससे नागरिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ये बसें गईं कहां?
नासिक में 50 PM ई-बसों के संचालन में सबसे बड़ी अड़चन इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन की तैयारियां पूरी न होना बनी हुई है। मामले की पड़ताल में सामने आया कि बसों को चार्ज करने के लिए जरूरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी तक तैयार नहीं हो सका है। ऐसे में लोकार्पण के बावजूद बसों को नियमित यात्री सेवा में उतारना संभव नहीं हो पाया है।
खास बात यह है कि चार्जिंग स्टेशन तैयार करने की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित बस सप्लायर कंपनी की है। चार्जिंग सुविधा के अभाव में बसें फिलहाल आडगांव बस डिपो में खड़ी हैं। अब चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का काम कब पूरा होता है और ई-बस सेवा कब शुरू होती है, इस पर नागरिकों की नजर है।
इसके अलावा, बसों का आवश्यक तकनीकी ट्रायल और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से आधिकारिक पंजीकरण व परमिट मिलने की कानूनी प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। यही वजह है कि ये सभी 50 ई-बसें फिलहाल आडगांव बस डिपो में धूल खा रही हैं।
पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत नासिक मनपा को कुल 100 बसें आवंटित की जानी है। इनमें से पहली खेप के रूप में मिली 50 बसों के संचालन के लिए मनपा ने जुलाई महीने में 'जेबीएम इकोलाइफ मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी के साथ 10 वर्षों का अनुबंध किया है।
इस करार के तहत बसों की खरीद, दैनिक संचालन, रखरखाव और संपूर्ण प्रबंधन का जिम्मा संबंधित कंपनी पर है। मनपा ऑपरेटर को प्रति किलोमीटर 74 रुपये की दर से भुगतान करेगी, जिसमें से केंद्र सरकार द्वारा प्रति किलोमीटर 24 रुपये की आर्थिक सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इस तरह मनपा पर शुद्ध संचालन खर्च करीब 50 रुपये प्रति किलोमीटर आएगा।