

Nashik Farmers Protest: नासिक एपीएमसी में प्याज के दाम में काफी गिरावट आई है, और अभी प्याज औसतन ७०० से 1300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है। इससे प्याज उगाने वाले किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
इसी बीच, शरद जोशी की अगुवाई में नासिक जिला किसान संगठन आक्रामक हो गया है, और मांग कर रहा है कि केंद्र सरकार प्याज के बाजार दाम और एक्सपोर्ट पर तुरंत कोई ठोस कदम उठाए, लासलगांव एपीएमसी में जनवरी में जिले की प्रमुख कृषि उपज मंडी समितियों में 35 लाख क्विंटल लाल प्याज की बंपर आवक से बाजार दामों में भारी गिरावट आई है।
घरेलू और विदेशी मांग के मुकाबले सप्लाई बढ़ने से प्याज उगाने वाले किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, जनवरी में करीब 269 करोड़ 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
इस साल भारी बारिश के कारण प्याज के पौधे खराब हो गए थे। इसके बाद किसानों ने ऊंचे दामों पर प्याज के बीज खरीदें और उन्हें लगाया। प्याज लगाने और कटाई का खर्च 12,000 से 14,000 रुपये प्रति एकड़ तवा पहुंच गया है, और केमिकल खाद और पेस्टीसाइड के दाम भी काफी बढ़ गए है। ऐसे में प्याज उगाने वाले किसानों के सामने सचमुच अकाल की स्थिति है।
किसान संगठन ने मांग की है कि जिले के विधायक और सासद राज्य और केंद्र सरकारी पर दबाव डालकर प्याज उगाने वाले किसानों को राहत दिलाने के लिए ठोस फैसले लें, नहीं तो, शरद जोशी की अगुवाई में नासिक जिला किसान संगठन सड़कों पर उतरकर विरोच करेगा, और विधायक और सांसद का घेराव किया जाएगा, संगठन ने यह भी चेतावनी दी है।
जनवरी की शुरुआत में जहां प्याज के ठीक-ठाक दाम मिल रहे थे, वहीं महीने के आखिर तक हालात पूरी तरह बदल गए। 1 जनवरी को लासलगांव मार्केट कमेटी में अधिकतम दाम 2,611 रुपये, न्यूनतम दाम 700 रुपये और औसत दाम 1,870 रुपये था।
लेकिन, 31 जनवरी तक अधिकतम दाम 1,460 रुपये पर आ गया, हालांकि मार्केट कमेटियों में लाल प्याज बड़ी मात्रा में आ गया है, लेकिन सरकार की एक्सपोर्ट पॉलिसी सही नहीं है। सरकार जानबूझकर प्याज किसानों को नजरअंदाज करना चाहती है, ऐसे में किसान संगठन प्याज किसानों के साथ खड़ा रहेगा और उन्हें न्याय दिलाएगा।
- जिला अध्यक्ष, किसान संगठन, अर्जुन बोराडे