नासिक में प्याज की खेती पर पानी का संकट, लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 39% क्षेत्र में रोपाई

Nashik Onion Cultivation Crisis: नासिक जिले में पानी की किल्लत से लेट खरीफ प्याज की रोपाई प्रभावित, 52,838 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 20,581 हेक्टेयर में खेती
Nashik Onion Cultivation Crisis
नासिक में प्याज की खेती का संकटसोर्स: सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights

  • नासिक जिले में प्याज की रोपाई का लक्ष्य 52,838 हेक्टेयर, लेकिन अब तक केवल 20,581 हेक्टेयर में रोपाई।

  • पिछले साल 15 अक्टूबर तक 49,833 हेक्टेयर में हो चुकी थी प्याज की खेती।

  • किसानों ने बीज और खाद पर प्रति एकड़ 20,000 से 25,000 रुपये खर्च किए, लेकिन सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं।

  • मालेगांव और येवला जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों में रोपाई की स्थिति बेहद चिंताजनक।

  • रोपाई का क्षेत्र घटने से जनवरी-फरवरी में प्याज की आवक प्रभावित होने और कीमतें बढ़ने की आशंका।

Nashik Onion Cultivation Water Shortage: नासिक जिले में कम बारिश और सिंचाई के पानी की कमी के कारण लेट खरीफ प्याज की खेती गंभीर संकट में है। कृषि विभाग ने 52,838 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन अब तक केवल 20,581 हेक्टेयर में ही रोपाई हो सकी है। पिछले वर्ष 15 अक्टूबर तक 49,833 हेक्टेयर में प्याज की रोपाई पूरी हो चुकी थी।

पानी की किल्लत से नासिक में प्याज की रोपाई प्रभावित

इस बार किसानों ने अगस्त-सितंबर में महंगे बीज और खाद खरीदकर पौध तैयार की, जिस पर प्रति एकड़ 20,000 से 25,000 रुपये खर्च हुए। अब कुओं का जलस्तर घटने और बोरवेल सूखने से पौध की रोपाई करना मुश्किल हो गया है। मालेगांव और येवला सहित कई प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक है। रोपाई का रकबा कम रहने पर अगले साल की शुरुआत में प्याज की आवक घटने और बाजार में कीमतें बढ़ने की आशंका है।

Nashik Onion Cultivation Crisis
छात्र संसद चुनाव मतपत्रों से कराने की मांग, छत्रपति संभाजीनगर बैठक में राज्यस्तरीय समिति के सामने उठे मुद्दे

किसानों की लागत डूबने का खतरा

नासिक, महाराष्ट्र के प्रमुख प्याज उत्पादक नासिक जिले में कम बारिश और सिंचाई के पानी की कमी के कारण लेट खरीफ प्याज की खेती गंभीर संकट में आ गई है। कृषि विभाग ने इस सीजन में 52,838 हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की रोपाई का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक केवल 20,581 हेक्टेयर क्षेत्र में ही रोपाई हो सकी है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

पिछले वर्ष 15 अक्टूबर तक जिले में 49,833 हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की रोपाई हो चुकी थी। इस बार समान अवधि में रोपाई का क्षेत्र काफी कम है। किसान तैयार पौध होने के बावजूद पानी की कमी के कारण समय पर रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।

बीज और खाद पर खर्च, अब सिंचाई के लिए पानी नहीं

किसानों ने अगस्त और सितंबर के दौरान महंगे बीज तथा खाद खरीदकर प्याज की पौध तैयार की थी। इस प्रक्रिया में प्रति एकड़ लगभग 20,000 से 25,000 रुपये तक खर्च किए गए। अब पौध खेतों में रोपाई के लिए तैयार है, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

जिले के कई इलाकों में कुओं का जलस्तर नीचे चला गया है, जबकि अनेक बोरवेल भी सूख गए हैं। ऐसे में किसानों को तैयार पौध बचाने और समय पर रोपाई पूरी करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। देरी बढ़ने पर खेती की लागत डूबने का खतरा भी बढ़ सकता है।

Nashik Onion Cultivation Crisis
छत्रपति संभाजीनगर में 5,700 पोषण आहार सहायिकाओं का छह माह से मानदेय बकाया, दीपावली से पहले बढ़ी परेशानी

मालेगांव और येवला में स्थिति गंभीर

जिले के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों में रोपाई की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मालेगांव में प्याज की खेती का औसत क्षेत्र 13,037 हेक्टेयर है, लेकिन इस बार अब तक केवल 2,807 हेक्टेयर में रोपाई हुई है। येवला में 10,568 हेक्टेयर के औसत क्षेत्र के मुकाबले महज 622 हेक्टेयर में रोपाई दर्ज की गई है।

नांदगांव में 6,470 हेक्टेयर के मुकाबले 3,144 हेक्टेयर और देवला में लगभग 5,496 हेक्टेयर के मुकाबले 3,805 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई हुई है। चांदवड में 11,744 हेक्टेयर के औसत क्षेत्र के मुकाबले 7,840 हेक्टेयर में खेती की गई है। सटाणा, कलवण, निफाड और सिन्नर जैसे क्षेत्रों में भी रोपाई प्रभावित हुई है।

प्याज की कीमतों पर पड़ सकता है असर

लेट खरीफ प्याज सामान्यतः जनवरी और फरवरी में बाजार में पहुंचता है। इस बार रोपाई का क्षेत्र कम रहने और फसल प्रभावित होने की स्थिति में अगले साल की शुरुआत में प्याज की आवक पर असर पड़ सकता है। यदि बाजार में आपूर्ति घटती है, तो कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।

फिलहाल किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तैयार पौध को बचाने और पानी उपलब्ध होने पर समय पर रोपाई पूरी करने की है।

Navbharat Live
navbharatlive.com