

छत्रपति संभाजीनगर जिले की करीब 5,700 पोषण आहार सहायिकाओं का छह माह से मानदेय बकाया होने का दावा।
सहायिकाओं को प्रतिमाह 2,500 रुपये मानदेय मिलता है।
जिले के 3,166 स्कूलों में करीब 4.5 लाख विद्यार्थियों को पोषण आहार दिया जाता है।
भुगतान में देरी के कारण स्कूलों को किराना दुकानदारों से उधार पर सामग्री लेनी पड़ रही है।
बकाया भुगतान नहीं होने पर प्रधानाचार्यों और सहायिकाओं ने आंदोलन की चेतावनी दी।
Chatrapati Sambhajinagar Mid-Day Meal Pending Wages: छत्रपति संभाजीनगर जिले में स्कूलों के पोषण आहार कार्यक्रम से जुड़ी करीब 5,700 सहायिकाओं का मानदेय छह माह से लंबित होने का मामला सामने आया है। सहायिकाओं को प्रतिमाह 2,500 रुपये मानदेय मिलता है। भुगतान नहीं होने से दीपावली से पहले उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ गई हैं। इसके साथ ही स्कूलों में पूरक आहार, ईंधन और अन्य आवश्यक सामग्री के भुगतान में भी देरी हो रही है।
जिले के 3,166 जिला परिषद, नगरपालिका, निजी अनुदानित और आंशिक अनुदानित स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब साढ़े चार लाख विद्यार्थियों को पोषण आहार दिया जाता है। भुगतान अटकने के कारण कई स्कूल किराना दुकानदारों से उधार पर अनाज और पूरक आहार लेने को मजबूर हैं। गैस भरवाने की जिम्मेदारी भी प्रधानाचार्यों पर आ गई है। शिक्षा विभाग के अनुसार, नई एसएनएस स्पर्श प्रणाली के कारण भुगतान प्रक्रिया में देरी हो रही है। विभाग ने तीन माह का करीब सवा चार करोड़ रुपये मानदेय बकाया होने की जानकारी दी है। बकाया राशि तत्काल जारी नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारियों ने आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
छत्रपति संभाजीनगर, स्कूलों में बच्चों को पोषण आहार परोसने वाली सहायिकाओं को पिछले छह माह से मानदेय नहीं मिलने का मामला सामने आया है। जिले की करीब 5,700 सहायिकाओं का भुगतान लंबित होने से उनकी आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं, स्कूलों में पूरक आहार और ईंधन के भुगतान में देरी के कारण प्रधानाचार्यों को भी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पोषण आहार सहायिकाओं को प्रतिमाह 2,500 रुपये मानदेय दिया जाता है। लेकिन लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। दीपावली से पहले बकाया राशि नहीं मिलने से उनकी चिंता और बढ़ गई है।
सहायिकाओं के मानदेय के साथ-साथ मार्च-अप्रैल तथा जून से संबंधित पूरक आहार, ईंधन और मानदेय का भुगतान भी लंबित बताया गया है। इससे स्कूलों में पोषण आहार योजना के संचालन पर भी दबाव पड़ रहा है।
जिले के 3,166 जिला परिषद, नगरपालिका, निजी अनुदानित और आंशिक अनुदानित स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब साढ़े चार लाख विद्यार्थियों को पोषण आहार दिया जाता है।
भुगतान में देरी के कारण कई स्कूलों को किराना दुकानदारों से उधार पर अनाज और पूरक आहार की सामग्री लेनी पड़ रही है। गैस भरवाने के लिए भी प्रधानाचार्यों को जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। इससे स्कूलों के नियमित संचालन और पोषण आहार व्यवस्था पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, नई एसएनएस स्पर्श प्रणाली के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया में देरी हो रही है। विभाग ने तीन माह का करीब सवा चार करोड़ रुपये मानदेय बकाया होने की बात कही है। हालांकि, सहायिकाओं की ओर से छह माह से भुगतान नहीं होने की शिकायत की गई है।
सहायिकाओं का बकाया मानदेय तत्काल जमा करने की मांग की गई है। जिला अध्यक्ष बाबूलाल राठोड़, ज्ञानेश्वर पठाडे सहित अन्य पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि भुगतान जल्द नहीं किया गया, तो प्रधानाचार्यों और सहायिकाओं को साथ लेकर आंदोलन किया जाएगा।
सहायिकाओं और स्कूलों की मांग है कि लंबित मानदेय के साथ पोषण आहार सामग्री और ईंधन की बकाया राशि भी जल्द जारी की जाए, ताकि आर्थिक परेशानियों को कम किया जा सके और विद्यार्थियों के लिए पोषण आहार की व्यवस्था सुचारु बनी रहे।