नाराज बहन को मनाने पहुंचती हैं महालक्ष्मी, नासिक में 12 साल से निभाई जा रही अनोखी धार्मिक परंपरा

Nashik Navratri Tradition Mahalaxmi Festival:नवरात्र की पंचमी पर महालक्ष्मी और टेंबलाई देवी के पारंपरिक मिलन का उत्सव मनाया गया। ढोल-ताशों, पालखी और धार्मिक अनुष्ठानों में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए।
Nashik Navratri tradition Mahalaxmi festival
नासिक नवरात्रि परंपरा महालक्ष्मी उत्सवसोर्स: सोशल मीडिया
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Highlights

  • नासिक में नवरात्र की पंचमी पर महालक्ष्मी और टेंबलाई देवी के मिलन का आयोजन।

  • नाराज बड़ी बहन को मनाने की पौराणिक मान्यता से जुड़ी परंपरा।

  • ढोल-ताशों और पालखी सोहले के बीच संपन्न हुआ धार्मिक उत्सव।

  • नासिक में पिछले 12 वर्षों से आयोजन किए जाने की जानकारी।

  • बागूल परिवार सहित मंदिर से जुड़े प्रमुखों और सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति।

Nashik Navratri Mahalakshmi Devi Tembalai Devi Tradition: नासिक में नवरात्र की पंचमी पर महालक्ष्मी देवी और उनकी बड़ी बहन टेंबलाई (त्रंबोली) देवी के पारंपरिक मिलन का उत्सव श्रद्धा के साथ मनाया गया। पौराणिक मान्यता के अनुसार, नाराज टेंबलाई देवी को मनाने के लिए महालक्ष्मी देवी हर साल उनके दर्शन करने जाती हैं। ढोल-ताशों, पालखी सोहले और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच सैकड़ों श्रद्धालु इस परंपरा के साक्षी बने।

नाराज बहन को मनाने की अनोखी परंपरा

नासिक, नवरात्रि के दौरान देशभर में देवी आराधना और पारंपरिक धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व रहता है। इसी कड़ी में नासिक शहर में महालक्ष्मी देवी और उनकी बड़ी बहन टेंबलाई (त्रंबोली) देवी के पारंपरिक मिलन का उत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। नवरात्र की पंचमी तिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम में पालखी सोहले, ढोल-ताशों की गूंज और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।

यह परंपरा एक पौराणिक कथा से जुड़ी है, जिसके अनुसार महालक्ष्मी देवी हर साल अपनी नाराज बड़ी बहन टेंबलाई देवी को मनाने और उनकी नाराजगी दूर करने के लिए उनके दर्शन करने जाती हैं।

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कोल्हासुर के वध से जुड़ी है मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में टेंबलाई देवी ने कोल्हासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस विजय का उत्सव मनाते समय महालक्ष्मी देवी टेंबलाई देवी को आमंत्रित करना भूल गईं। इससे नाराज होकर टेंबलाई देवी पास की पहाड़ी पर जाकर एकांत में रहने लगीं।

कहा जाता है कि तभी से महालक्ष्मी देवी हर साल अपनी बड़ी बहन से मिलने और उन्हें मनाने जाती हैं। नवरात्र की पंचमी पर होने वाला यह पारंपरिक मिलन इसी पौराणिक कथा और बहनों के स्नेह का प्रतीक माना जाता है।

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ढोल-ताशों के साथ हुआ देवी मिलन

नासिक में पिछले 12 वर्षों से इस उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष भी महालक्ष्मी देवी के प्रतिनिधि के रूप में मनोज शिवाजी बागूल के परिवार ने टेंबलाई माता मंदिर में उपस्थित रहकर पारंपरिक भेंट की रस्म पूरी कराई।

आयोजन के दौरान महालक्ष्मी देवी को पालखी में विराजमान किया गया। ढोल-ताशों और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच देवी मिलन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति

इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में टेंबलाई माता मंदिर से जुड़े प्रमुखों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। रामसिंग बनी, याबाई बावरी, सुरेश पवार, मंगला पवार, प्रसाद बावरी, विजय पवार, किरण पवार और रवि पवार सहित कई लोग उपस्थित रहे।

बागूल परिवार के सदस्यों के साथ शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और सैकड़ों श्रद्धालु भी इस परंपरा के साक्षी बने। आयोजन ने नवरात्र के धार्मिक उत्साह के साथ स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को भी सामने रखा।

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