

Highlights:
राष्ट्रीय प्राकृतिक शेती मिशन के तहत नासिक में विठ्ठल-रुक्माई प्राकृतिक शेतकरी गट की बैठक आयोजित की गई।
किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने, कार्बन बढ़ाने और रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने ब्रॉड बेड फरो (BBF) और नॉन-बीबीएफ पद्धति से उगाई गई सोयाबीन फसलों का तुलनात्मक निरीक्षण किया।
Natural Farming in Nashik: राष्ट्रीय प्राकृतिक शेती मिशन के अंतर्गत विठ्ठल-रुक्माई प्राकृतिक शेतकरी गुट के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती का महत्व, जैविक आदानों के उपयोग और सोयाबीन फसल की आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी देने के लिए ग्राम-स्तरीय बैठक एवं प्रक्षेत्र भेंट का आयोजन किया गया। इस दौरान कृषि अनुसंधान क्षेत्र के विशेषज्ञों ने किसानों का मार्गदर्शन किया तथा बीबीएफ और नॉन-बीबीएफ पद्धति से उगाई गई सोयाबीन फसल का निरीक्षण किया।
इस कार्यक्रम में इगतपुरी स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र के सह-संशोधन निदेशक डॉ. रवींद्र कोलगड़े, निफाड स्थित गेहूं अनुसंधान केंद्र के गेहूं विशेषज्ञ प्राध्यापक भालचंद्र म्हस्के और पिंपलगांव बसवंत के प्याज एवं अंगूर अनुसंधान केंद्र से डॉ. भास्कर पाटील प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को आत्मा नासिक के परियोजना निदेशक अभिमन्यू काशीद, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी रवींद्र माने, तालुका कृषि अधिकारी ज्ञानेश्वर नाठे, मंडल कृषि अधिकारी नितिन पगार, उप कृषि अधिकारी रणजीत आंधले, सहायक कृषि अधिकारी योगिता घोरपडे, तालुका प्रौद्योगिकी प्रबंधक गोकुल जाधव तथा पुलिस पाटील कमलाकर रामराजे का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
ग्राम-स्तरीय बैठक के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती में जैविक आदानों के महत्व, उनके सही उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने, मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाने और रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने के बारे में प्रशिक्षित किया गया। किसानों से अपील की गई कि वे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग कर उत्पादन लागत को घटाने का प्रयास करें।
विशेषज्ञों के दल ने खेत पर जाकर 'ब्रॉड बेड फरो' (बीबीएफ) और नॉन-बीबीएफ पद्धतियों से उगाई गई सोयाबीन फसलों का प्रत्यक्ष मुआयना किया। दोनों पद्धतियों में पौधों की वृद्धि, उनकी स्थिति, जल निकासी, नमी प्रबंधन और फसल की समग्र स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। बीबीएफ पद्धति में चौड़े बेड और नालियों के जरिए अतिरिक्त पानी की बेहतर निकासी होती है, जिससे भारी बारिश के दौरान जड़ों के पास पानी ठहरने का जोखिम कम होता है। इस तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से किसानों को तकनीकी बारीकियां समझाई गईं।
राष्ट्रीय प्राकृतिक शेती मिशन के तहत प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और खेत दौरों के जरिए किसान समूहों को सशक्त बनाया जा रहा है। विठ्ठल-रुक्माई प्राकृतिक शेतकरी समूह के जरिए किसानों में जागरूकता पैदा करना, जैविक खेती को बढ़ावा देना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों का प्रसार करना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। कृषि विभाग, 'आत्मा' प्रणाली और अनुसंधान केंद्रों के समन्वय से आयोजित ऐसे कार्यक्रमों से किसानों को अनुसंधान-आधारित जानकारी मिल रही है, जिससे प्राकृतिक खेती के प्रभावी क्रियान्वयन को बल मिल रहा है।