नासिक मनपा चुनाव: भाजपा में टिकट बिक्री को लेकर बड़ा बवाल, BJP में अंदरूनी विस्फोट
BJP Ticket: नासिक महानगरपालिका चुनाव की घोषणा के साथ भाजपा में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कार्यकर्ताओं ने टिकटों की बिक्री और करोड़ों के लेनदेन का आरोप लगाते हुए नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik BJP Ticket Controversy: नासिक महानगरपालिका चुनाव की घोषणा के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक बड़ा विस्फोटक विवाद खड़ा हो गया है।
पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पार्टी ने चुनाव जीतने की होड़ में ‘आयाराम-गयारामों’ (बाहरी नेताओं) को तवज्जो देते हुए टिकटों की खुली बिक्री की है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि एक-एक टिकट 2 करोड़ रुपये में बेचा गया है और इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 244 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।
निष्ठावानों को मिला ‘आश्वासन’, बाहरी ले गए ‘टिकट’
महानगरपालिका चुनाव के लिए भाजपा के कई पुराने पदाधिकारियों ने सालों से जमीन पर काम किया था। लेकिन चुनावी माहौल गरमाते ही शिवसेना (उबाठा), मनसे, कांग्रेस और शिंदे सेना के कई दिग्गज भाजपा में शामिल हो गए।
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कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें अंत तक टिकट देने का आश्वासन दिया, लेकिन नामांकन के अंतिम समय में उन्हें दरकिनार कर दिया गया।
आरोप है कि भाजपा ने शहर से दूर एक गुप्त स्थान पर ‘दुकान’ सजाकर बाहरी उम्मीदवारों को मोटी रकम लेकर एबी फॉर्म बांटे, जबकि पुराने कार्यकर्ता बिना फॉर्म के ही पर्चा दाखिल करने को मजबूर हुए।
इन गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के संकटमोचक माने जाने वाले नेता गिरीश महाजन ने कहा कि टिकट न मिलने के कारण कुछ कार्यकर्ता गुस्से में हैं और 2 करोड़ रुपये लेने जैसे आरोप लगा रहे हैं।
गिरीश महाजन की सफाईः ‘होगी आरोपों की जांच’
- हम इन आरोपों की जांच करेंगे र महाजन ने स्वीकार किया कि 100+ सीटें जीतने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अन्य दलों से आए सक्षम व्यक्तियों को टिकट देना जरूरी था।
- उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन निष्ठावानों के साथ अन्याय हुआ है, उसे भविष्य में दूर किया जाएगा।
- खबर के विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि अब चुनाव लड़ने का तरीका बदल गया है।
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- उम्मीदवार अब पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं के बजाय ‘किराए पर लिए गए व्यक्तियों’ के माध्यम से प्रचार करवा रहे हैं।
- इससे पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं का मूल्य कम हो गया है और वे केवल एक कठपुतली बनकर रह गए है।
- अब देखना यह है कि 2 करोड रुपये में टिकट खरीदने वाले ये उम्मीदवार जनता का विश्वास जीत पाते हैं या नहीं।
