Nashik Corruption Allegations ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Corruption Allegations: नासिक मनपा की स्थायी समिति की बैठक भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण काफी हंगामेदार रही। सभापति मच्छिद्र सानप की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शिवसेना की नगरसेविका किरणताई गामणे (दराडे) ने नगर नियोजन विभाग में चल रहे कथित करोड़ों के खेल को उजागर किया।
घोटाले का केंद्र: किरणताई गामणे ने मुख्य रूप से दो बड़े मामलों में अधिकारियों और बिल्डरों की मिलीभगत का दावा किया। आरोप है कि 39,500 वर्गमीटर जमीन पर यूएलसी कानून और डीपी रोड का आरक्षण होने के बावजूद, जरूरी मंजूरी लिए बिना टीडीआर (हस्तांतरणीय विकास अधिकार) जारी कर दिया गया। जो जमीन शासन के कब्जे में होनी चाहिए थी, उस पर आर्थिक अनियमितता कर निजी लाभकमाया गया।
मामला न्यायालय में लंबित होने और मूल मालिक की लिखित आपत्ति (9 मई 2024) के बावजूद 7 करोड़ रुपये का टीडीआर मंजूर किया गया। सवाल उठाया गया कि एक ही लेआउट में एक बार एफएसआई और दो बार टीडीआर किस नियम के तहत दिया गया?
हंगामे के बीच समिति ने कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रस्तावों को भी हरी झंडी दिखाई। रिटायरमेंट उम्र वर्ग-2 और वर्ग-3 के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
बेरोजगार इंजीनियर शिक्षित बेरोजगार अभियंताओं को 10 लाख रुपये तक के काम बिना निविदा देने का निर्णय लिया गया। सामाजिक कार्य: दिव्यांगों और मानसिक रूप से विशेष व्यथितयों के लिए पुनर्वास केंद्र शुरू करने की योजना की मंजूरी मिली।
बैठक में सदस्य राहुल दिये ने गंभीर आरोप लगाया कि कुछ ठेकेदार खुद को मुख्यमंत्री का करीबी या आयुक्त का चहेता बताकर पार्थदी और प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं, उन्होंने रआयुक्त हमारे साथ है। तुम कौन होते हो ? जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कड़ा एतराज जताया।
यह भी पढ़ें:-शादी की तैयारियों पर संकट, मैरिज हॉल तलाश रहे विकल्प; जालना में LPG की बढ़ी चिंता
टीडीआर यानी Trans-ferable Develop-ment Rights, सरल शब्दों में कहें तो यह एक प्रकार का ‘डिजिटल या कागजी प्रमाणपत्र’ है जो जमीन के बदले दिया जाता है। टीडीआर घोटाला तब होता है जब नियमों को ताक पर रखकर यह प्रमाणपत्र उन लोगों को जारी कर दिया जाता है जो इसके पात्र नहीं है।