

NMC General Body Audit Irregularities: नासिक मनपा की अक्टूबर महासभा में ऑडिट की लंबित आपत्तियों, उद्यान विभाग की खरीद, सिंहस्थ कुंभ के कार्यों और वेस्ट टू वंडर पार्क को लेकर नगरसेवकों ने प्रशासन से जवाब मांगा। सभागृह के बाहर भी विभिन्न दलों के नगरसेवकों ने आंदोलन किया।
नासिक मनपा की अक्टूबर माह की महासभा में मंगलवार को विभिन्न मुद्दों को लेकर नगरसेवकों ने प्रशासन को घेरा। राजीव गांधी भवन स्थित महासभा सभागृह में दोपहर 2 बजे शुरू हुई बैठक में शुरुआत से ही ऑडिट, खरीद प्रक्रिया, सिंहस्थ कुंभ के कार्य और वेस्ट टू वंडर पार्क को लेकर सवाल उठाए गए।
महासभा से पहले सभागृह के बाहर भी ठाकरे गुट, शिवसेना शिंदे गुट और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नगरसेवकों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर आंदोलन किया। वहीं, सभागृह के भीतर सत्तारूढ़ भाजपा के नगरसेवकों ने भी प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की।
भाजपा नगरसेवक गुरुमित बग्गा ने मनपा के ऑडिट में सामने आई लंबित आपत्तियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1982 से ऑडिट में दर्ज कई आपत्तियों का अब तक निराकरण नहीं हुआ है। इसके अलावा वसूली योग्य राशि की वसूली भी लंबित होने का मुद्दा उन्होंने उठाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर हिमगौरी आडके आहेर ने ऑडिट से संबंधित त्रुटियों और मामलों की जांच के लिए मुख्य लेखा परीक्षक के साथ समिति गठित करने के निर्देश दिए।
उद्यान विभाग के कामकाज और खरीद प्रक्रिया को लेकर भी नगरसेवकों ने सवाल उठाए। भाजपा नगरसेवक दिनेश पाटील ने कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। शिवसेना नगरसेवक कैलास मुदलियार ने खरीद प्रक्रिया पर सवाल करते हुए दावा किया कि 10 हजार रुपए कीमत की वस्तु 21 हजार रुपए में खरीदी गई।
उन्होंने यह भी दावा किया कि 38 लाख रुपए की कृत्रिम घास और रबर फ्लोरिंग 81 लाख रुपए में खरीदी गई। नगरसेवकों ने इन मामलों की जांच की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि खबर में उपलब्ध नहीं है।
सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता, खर्च और कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठे। स्वस्तिक इंफा के माध्यम से किए जा रहे कार्यों की जांच की मांग की गई।
नए नासिक क्षेत्र के पाथर्डी शिवार में पांडवलेणी की तलहटी में शुरू किए गए वेस्ट टू वंडर पार्क का मुद्दा भी महासभा में उठा। संबंधित कार्य की जांच कर ठेका रद्द करने का प्रस्ताव रखा गया।
महासभा से पहले ठाकरे गुट के नगरसेवकों ने मनपा की सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण का विरोध किया। मनपा के स्वामित्व वाली महत्वपूर्ण जगहों को किराये पर देने के फैसले के खिलाफ आंदोलन किया गया। राजीव गांधी भवन, महापौर निवास और आयुक्त निवास को भी भविष्य में किराये पर दिए जाने की आशंका जताते हुए मनपा की संपत्ति को बचाने का मुद्दा उठाया गया।
महासभा में कर्मचारियों को 21 हजार रुपए सानुग्रह अनुदान देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।