राजीव गांधी भवन का 'अत्याधुनिक EOC' केवल कचरा और पुलिस जांच तक सीमित; नासिक मनपा की बड़ी योजना पर उठे सवाल

Nashik Municipal Corporation: स्मार्ट सिटी योजना के तहत बने नासिक के इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। करोड़ों की लागत वाला केंद्र सीमित कार्यों तक सिमटकर रह गया है।
Rajiv Gandhi Bhavan's 'state-of-the-art EOC' limited to just garbage and police investigations; questions raised over Nashik Municipal Corporation's ambitious plan.
इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर, स्मार्ट सिटी योजना,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

Nashik Smart City Mission: नासिक महानगरपालिका द्वारा स्मार्ट सिटी योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर राजीव गांधी भवन में स्थापित 'इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर' (ईओसी) अपनी उपयोगिता को लेकर सवालों के घेरे में है। आपदा प्रबंधन और आपातकालीन स्थितियों में विभागों के बीच समन्वय के लिए शुरू किया गया यह अत्याधुनिक केंद्र वर्तमान में केवल कचरा प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और पुलिस जांच तक ही सीमित रह गया है।

सेंटर की मूल भूमिका बनाम वर्तमान स्थिति

ईओसी को 24x7 नियंत्रण और प्रतिसाद व्यवस्था के लिए तैयार किया गया था, ताकि किसी भी आपदा या आपातकाल में नागरिकों को तत्काल मदद मिल सके। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है- आगजनी जैसी बड़ी आपदाओं के समय नागरिक सीधे फायर स्टेशन को कॉल करना अधिक उचित समझते हैं, जिससे ईओसी की भूमिका गौण हो गई है। सेंटर का एक बड़ा हिस्सा केवल सोशल मीडिया पर आने वाली शिकायतों के संकलन तक सीमित है। इन शिकायतों को संबंधित विभागों को भेजा तो जाता है, लेकिन वहां से होने वाली कार्रवाई बेहद धीमी है। सेंटर के तहत लगाए गए 200 से अधिक सार्वजनिक सूचना भोंगों का उपयोग अब तक केवल 3-4 बार ही हो पाया है, जो इसकी उपयोगिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।

पुलिस और प्रशासनिक निगरानी का साधन

वर्तमान में इस ईओसी का सर्वाधिक उपयोग पुलिस विभाग द्वारा अपराधों की जांच और संदिग्धों की तलाश के लिए सीसीटीवी के माध्यम से किया जा रहा है। साथ ही, घनकचरा विभाग के अधिकारी अपने कर्मचारियों पर नजर रखने के लिए इन कैमरों का उपयोग कर रहे हैं, जिस केंद्र का लक्ष्य 'आपातकालीन प्रतिसाद' था, वह आज 'प्रशासनिक निगरानी' का साधन बनकर रह गया है।

कार्यक्षमता का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं किया गया

जुलाई 2024: इस सेंटर के रखरखाव और तकनीकी प्रबंधन का जिम्मा एक निजी कंपनी को दिया गया था। ताकि तकनीक का बेहतर लाभ मिल सके, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सेंटर की कार्यक्षमता का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं किया गया और विभागों के बीच वास्तविक समन्वय स्थापित नहीं हुआ, तो यह करोड़ों का निवेश मात्र एक दिखावा बनकर रह जाएगा।

सिस्टम फिलहाल शिकायतों के संकलन तक सीमित

  • सीसीटीवी नेटवर्क: 200 से अधिक कैमरे, जो पुलिस जांच में ती सहायक हैं, पर आपदा प्रबंधन में कम।
  • सार्वजनिक सूचना तंत्रः 200 भोंगे, जिनका आपातकालीन सूचनाओं के लिए न के बराबर उपयोग हुआ।
  • डिजिटल मॉनिटरिंग: अत्याधुनिक कंट्रोल सिस्टम, जो फिलहाल शिकायतों के संकलन तक सीमित है।
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com