नासिक मनपा में अनोखा विरोध: मनपा में पदोन्नति पर विवाद, अभियंता संजय अडसरा 9 महीने से जमीन पर बैठकर कर रहे काम
Nashik Sanjay Adsara protest: नासिक मनपा में पदोन्नति विवाद को लेकर कार्यकारी अभियंता संजय अडसरा 9 महीनों से कुर्सी छोड़कर जमीन पर बैठकर काम कर रहे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
Nashik Municipal Corporation Promotion Dispute ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Municipal Corporation Promotion Dispute: नासिक महानगरपालिका में पिछले 9 महीनों से एक ऐसी तस्वीर देखने को मिल रही है जो प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करती है, कार्यकारी अभियंता संजय अडसरा ने पदोन्नति प्रक्रिया में हुए कथित अन्याय के विरोध में अपनी कुर्सी छोड़ दी है और वे दफ्तर में जमीन पर बैठकर अपना काम कर रहे हैं
आंदोलन की जड़ः पदोन्नति और नियमों का खेल
अडसरा का आरोप है कि सहायक कनिष्ठ अभियंता पद की पदोन्नति प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती गई है। उनके अनुसार, आवश्यक अंक और योग्यता होने के बावजूद सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को दरकिनार किया गया।
उनका दावा है कि आरक्षण के नियमों का गलत अर्थ निकालकर कुछ खास उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया, जो भारतीय संविधान के ‘समान अवसर’ के सिद्धांत के खिलाफ है। अडसरा ने मांग की है कि यदि उनके आरोप सही हैं तो अवैध पदोन्नतियां रद्द की जाएं, और यदि गलत हैं तो उन्हें खुद कठोर दंड दिया जाए।
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गहरा मानसिक कष्ट
संजय अडसरा पिछले 23 वर्षों से मनपा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि पदोन्नति के इस विवाद के कारण उन्हें गहरा मानसिक और शारीरिक कष्ट उठाना पड़ रहा है, प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने के कारण उन्होंने अब उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। दिलवस्प बात यह है कि वे अपने विरोध के साथ-साथ अपनी विभागीय जिम्मेदारियों की भी पूरी क्षमता से निभा रहे है।
नई सत्ता से उम्मीदें
हैरान करने वाली बात यह है कि 9 महीने बीत जाने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले में कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं किया है। नासिक में अब प्रशासकीय राज खत्म हो चुका है और नए जनप्रतिनिधि चुनकर आए है। अब पूरे शहर की नजर इस बात पर है कि नए महापौर और नगरसेवक इस पुराने विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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नई सत्ता से हस्तक्षेप की उम्मीद
आंदोलनकारी संजय अडसरा (कार्यकारी अभियंत्ता, जलापूर्ति विभाग)।
शुरुआत: 7 जुलाई 2025 (लगभग 9 महीने पूरे),
स्वरूपः आधिकारिक कुर्सी का त्याग कर जमीन पर बैठकर काम करना।
मुख्य मुद्दाः पदोन्नति प्रक्रिया में नियमों का कथित उल्लंघन,
वर्तमान स्थितिः मामला उच्च न्यायालय में लंबित, नई सत्ता से हस्तक्षेप की उम्मीद
