

दिवाली पर ध्वनि प्रदूषण मापने के लिए MPCB ने पांच केंद्र तय किए।
सीबीएस, दहीपुल, पंचवटी, सिडको और बिटको पॉइंट पर होगी निगरानी।
विशेष टीमें दिन और रात दोनों समय ध्वनि स्तर दर्ज करेंगी।
रिहायशी क्षेत्रों में दिन की सीमा 55 और रात की 45 डेसीबल निर्धारित।
दिवाली के बाद पांचों केंद्रों की विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी।
Nashik MPCB Diwali Noise Pollution Level Monitoring: दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल नजर रखेगा। नासिक के सीबीएस, दहीपुल, पंचवटी, सिडको और बिटको पॉइंट पर विशेष टीमें दिन और रात ध्वनि स्तर मापेंगी। दिवाली के बाद इन केंद्रों की रिपोर्ट जारी की जाएगी।
नासिक में दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर इस बार महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) की विशेष नजर रहेगी। त्योहार के दौरान शहर में बढ़ने वाले शोर का वास्तविक स्तर जानने के लिए मंडल ने पांच प्रमुख स्थानों पर निगरानी की तैयारी पूरी कर ली है। विशेष टीमें दिन और रात दोनों समय ध्वनि स्तर दर्ज करेंगी।
MPCB ने ध्वनि प्रदूषण मापने के लिए सीबीएस, दहीपुल, पंचवटी, सिडको और बिटको पॉइंट का चयन किया है। इन स्थानों पर वाहनों की आवाजाही, बाजारों में भीड़ और पटाखों के शोर को देखते हुए निगरानी की जाएगी।
व्यावसायिक क्षेत्र होने के कारण दहीपुल और यातायात के प्रमुख केंद्र सीबीएस पर विशेष ध्यान रहेगा। लक्ष्मी पूजन के दिन पटाखों की आतिशबाजी बढ़ने से ध्वनि स्तर निर्धारित सीमा से ऊपर जाने की आशंका है।
MPCB की विशेष टीमें पांचों केंद्रों पर दिन और रात ध्वनि स्तर का मापन करेंगी। इस निगरानी से यह पता चल सकेगा कि दिवाली के दौरान पटाखों और वाहनों के शोर से ध्वनि प्रदूषण कितना बढ़ता है।
दिवाली के बाद पांचों केंद्रों से मिले आंकड़ों की विस्तृत रिपोर्ट आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी। इस रिपोर्ट पर नागरिकों के साथ प्रशासन की भी नजर रहेगी।
पर्यावरण संबंधी ध्वनि प्रदूषण नियमों के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों के लिए दिन और रात की ध्वनि सीमा तय की गई है। रिहायशी क्षेत्रों में दिन के समय अधिकतम 55 डेसीबल और रात के समय 45 डेसीबल की सीमा निर्धारित है।
दिन: सुबह 6 से रात 10 बजे तक – 55 डेसीबल।
रात: रात 10 से सुबह 6 बजे तक – 45 डेसीबल।
हर साल दिवाली के दौरान पटाखों और वाहनों के शोर से शहर के कई हिस्सों में ध्वनि का स्तर बढ़ जाता है। तेज आवाज वाले पटाखों का असर वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों और मरीजों पर पड़ सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए MPCB और शहर प्रशासन ने नागरिकों से देर रात तक पटाखे नहीं फोड़ने और पर्यावरण अनुकूल दिवाली मनाने की अपील की है।