

नासिक में ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई।
स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका क्रमांक 1/2026 पर सुनवाई के दौरान व्यवस्था पर सवाल उठाए।
संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार का उल्लेख किया।
उद्योगों, निर्माण स्थलों, वाहनों और त्योहारों के दौरान पटाखों व लाउडस्पीकरों से होने वाले प्रदूषण पर ध्यान दिया।
शांति क्षेत्रों में नियंत्रण, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और शिकायत निवारण व्यवस्था प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
Nashik Air Noise Pollution Control: नासिक में ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए सवाल किया कि वर्षों से नियम और नियंत्रण व्यवस्था होने के बावजूद प्रदूषण पर अपेक्षित रोक क्यों नहीं लग पा रही है। स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका क्रमांक 1/2026 की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। साथ ही, शांति क्षेत्रों में विशेष नियंत्रण, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, शिकायतों के निवारण और प्रदूषण मापने वाले उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।
नासिक शहर में ध्वनि प्रदूषण के साथ वायु और पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका क्रमांक 1/2026 पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि वर्षों से नियम और नियंत्रण की व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रदूषण की स्थिति में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं हो रहा है। अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण में जीवन जीने का अधिकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। ऐसे में प्रदूषण की समस्या केवल प्रशासनिक व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि व्यापक जनहित से जुड़ा मुद्दा है। सुनवाई के दौरान बड़े और छोटे उद्योगों, निर्माण स्थलों तथा वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन के अलावा त्योहारों के दौरान पटाखों और लाउडस्पीकरों से होने वाले प्रदूषण को भी महत्वपूर्ण माना गया।
22 सितंबर 2026 को दिए गए निर्देशों के संदर्भ में अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को किसी विशेष त्योहार या अवसर तक सीमित रखने के बजाय उनका नियमित और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। शांति क्षेत्रों में विशेष नियंत्रण लागू करने, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने और प्रदूषण संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता बताई गई। इसके साथ ही प्रदूषण मापने वाले उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया गया।
अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए संबंधित संस्थाओं की भूमिका और जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। इसमें पुलिस आयुक्तों, महानगरपालिका आयुक्तों और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित विभागों की जिम्मेदारी शामिल है। प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विभागों के बीच समन्वय और जमीनी स्तर पर कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी गई।
बॉम्बे हाईकोर्ट की चिंता का प्रमुख पहलू यह है कि नियम और नियंत्रण की व्यवस्थाएं लंबे समय से मौजूद होने के बावजूद प्रदूषण पर अपेक्षित प्रभाव क्यों नहीं दिखाई दे रहा है। प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केवल निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका नियमित पालन और उल्लंघनों पर उचित कार्रवाई भी आवश्यक है।