नासिक में मानसून की बेरुखी से गहराया संकट, खेती, पानी और जीवन प्रभावित, किसानों को बुआई टालने की सलाह
Nashik Monsoon: नासिक जिले में मानसून की देरी से खेती-किसानी और पेयजल संकट गहरा गया है। कम बारिश, सूखे हालात और प्रशासनिक चेतावनी के बीच किसानों को फिलहाल बुआई टालने की सलाह दी गई है।
- Written By: अनन्या तिवारी
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-AI)
Nashik Monsoon Delay Impact On Farmers: जून का तीसरा हफ्ता बीतने के बावजूद नासिक जिले में मानसून की बेरुखी ने जनजीवन को संकट में डाल दिया है। आमतौर पर जून के मध्य तक हरियाली से लबालब रहने वाले नदी-नाले इस बार पूरी तरह सूखे पड़े हैं।
भीषण गर्मी और बारिश की कमी ने न केवल खेती-किसानी को ठप कर दिया है, बल्कि पीने के पानी का संकट भी गहरा दिया है। पहाड़ी और पर्यटन क्षेत्रों की स्थिति चिंताजनक है।
नासिक के पर्यटन स्थल जो पहले हरे-भरे हुआ करते थे वो अब सूखे पड़े हैं। जो पहिणे बारी, बारी और दुगारवाडी जैसे स्थान इस समय प्राकृतिक झरनों से गुलजार रहते थे, वहां अब केवल सूखी चट्टानें और पत्थर नजर आ रहे हैं।
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विकास के कार्यों में हो रहा पानी का उपयोग
सिंहस्थ कुंभमेले के विकास कार्यों के लिए तालाबों को खाली कर दिया गया है। बारिश में देरी होने से मवेशियों के लिए पानी की एक बूंद भी मिलना मुश्किल हो गया है। एक तरफ प्रशासन नागरिकों को पानी बचाने की सलाह दे रहा है, तो दूसरी तरफ विकास कार्यों में पानी का भारी उपभोग जारी है।
किसान बुआई में न करें जल्दबाजी
इस बार मानसून सीजन में अल निनों के स्पष्ट प्रभाव के कारण नासिक जिले में वर्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जून महीने में अब तक औसत से बेहद कम, मात्र 10.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने कृषि विभाग की जिला स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक में किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
उन्होंने कहा है कि फिलहाल बुआई की जल्दबाजी करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसान तब तक बुआई न करें जब तक कि मिट्टी में पर्याप्त नमी न हो जाए। जब तक जमीन में बुआई के अनुकूल पर्याप्त नमी सुनिश्चित न हो जाए और न्यूनतम 75 से 100 मिलीमीटर बारिश न हो जाए, तब तक बुआई को टालना ही समझदारी है।
किसान बुआई को एक साथ करने के बजाय चरणों में करें, ताकि अगर बारिश फिर से रुकती है तो नुकसान को कम किया जा सके।
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इन तकनीकों को अपनाएं किसान
कम बारिश की आशंका के मद्देनजर कृषि विभाग ने किसानों को पारंपरिक और कम पानी में उगने वाली फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है, जैसे ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग, उड़द और तिल की खेती को बढ़ावा दे।
जोखिम कम करने के लिए ‘अरहर + सोयाबीन’ या ‘बाजरा अरहर’ जैसी मिश्रित फसल पद्धतियां अपनाएं, मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए जिले के 1,605 गांवों में ‘ब्रॉड बेड फरो’ तकनीक का प्रसार करने के निर्देश दिए गए है।
किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए उठाए जा रहा है यह कदम
मौसम के पूर्वानुमान और कृषि संबंधी समाधान के लिए कृषि विभाग के आधिकारिक ‘महाविस्तार’ ऐप का उपयोग करने की सलाह दी गई है। जिले में 84 प्रतिशत किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है। जिलाधिकारी ने शेष किसानों के पंजीकरण के साथ-साथ ई-केवाईसी और आधार सीडिंग की प्रक्रिया को तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
