

Nashik SIT Investigation MHADA Case: म्हाडा घरकुल घोटाले में महानगरपालिका के नगर नियोजन विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बिल्डरों को बड़ा झटका दिया है। नगर नियोजन उपसंचालक ने 49 मामलों में 168 लोगों की सुनवाई करने के बाद पहले चरण में 26 अनंतिम अभिन्यास (टेंटेटिव लेआउट) स्थाई रूप से रद्द कर दिए हैं। इसके साथ ही, अंतिम रूप से स्वीकृत लेआउट की पैमाइश को लेकर भूमि अभिलेख विभाग से अभिप्राय मांगा गया है।
गौरतलब है कि महानगरपालिका सीमा के भीतर एक एकड़ से अधिक के भूखंडों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 20 प्रतिशत फ्लैट आरक्षित रखने के नियम से बचने के लिए बिल्डरों ने फर्जी दस्तावेज पेश किए थे। सातबारा के टुकड़े कर किए गए इस म्हाडा घरकुल घोटाले के उजागर होने के बाद पुलिस में मामला दर्ज किया गया है। राज्य सरकार ने भी इस घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है।
इस पूरे प्रकरण में म्हाडा, राजस्व, महानगरपालिका, भूमि अभिलेख कार्यालय के अधिकारियों और बड़े बिल्डरों की मिलीभगत सामने आ रही है। पुलिस और एसआईटी की जांच के बीच अब मनपा ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है। नगर नियोजन उपसंचालक रितेश चव्हाण ने कुल 108 मामलों में से घोटाले से जुड़े 49 मामलों में शामिल बिल्डरों सहित 197 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान 168 लोगों ने अपना पक्ष रखा, जिसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए 26 लेआउट रद्द करने का निर्णय लिया है।
चर्चा है कि पिछले डेढ़ से दो वर्षों से यह मामला चल रहा है, जिस दौरान म्हाडा ने बार-बार पत्र लिखकर नगर नियोजन विभाग से स्वीकृत लेआउट और निर्माण कार्यों की जानकारी मांगी थी। हालांकि, उस समय महानगरपालिका ने इन पत्रों को नजरअंदाज किया और यहां तक कि इस मामले से अपना कोई संबंध न होने की भूमिका भी अपनाई थी। अब जब जांच की तलवार सिर पर लटकती दिखी, तो प्रशासन ने खुद को बचाने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।