Nagpur: टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ी सौगात की तैयारी, सब्सिडी बढ़ाने और DBT लागू करने पर सरकार का फोकस

Nagpur Textile Subsidy Scheme: टेक्सटाइल सेक्टर को सब्सिडी सीधे खातों में पहुंचाने की तैयारी। पावरलूम, हैंडलूम और जिनिंग इकाइयों से पंजीयन बढ़ाने की अपील, DBT योजना पर जोर।
Nagpur: Preparations Underway for a Major Boost to the Textile Sector; Government Focuses on Increasing Subsidies and Implementing DBT
टेक्सटाइल सब्सिडी योजना,(प्रतिकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Powerloom Registration Drive: नागपुर शहर में राज्य और केंद्र सरकार टेक्सटाइल उद्योग को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर सब्सिडी दे रही हैं। सब्सिडी सही व्यक्तियों, कंपनियों, पावरलूम, हैंडलूम, कोऑपरेटिव सेक्टर तक पहुंच रही है या नहीं, इसकी सटीक जानकारी विभाग और सरकार को नहीं मिल पा रही है। सरकार विविध गतिविधियों के लिए और अधिक सब्सिडी देने की योजना बना रही है।

डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी स्कीम भी लाने की योजना है, लेकिन कंपनियां, पावरलूम, हैंडलूम, विविंग, जिनिंग सेक्टर के लोग आगे नहीं आ रहे हैं। वस्त्रोद्योग आयुक्तालय ने ऐसे लोगों को सामने आकर पंजीयन करने को कहा है ताकि खाते में सीधे लाभ आ सके।

वस्त्रोद्योग आयुक्त संजय देने ने 'नवभारत' से चर्चा करते हुए कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर राज्य सरकार भी काफी गंभीर है क्योंकि कृषि के बाद सर्वाधिक राजस्व और रोजगार में योगदान इसी सेक्टर का है। इसलिए सरकार अलग-अलग योजनाओं के जरिए इन सेक्टर के हाथ को मजबूत करना चाहती है।

सब्सिडी योजना को व्यापक बनाना चाहती है। यह भी चाहती है कि जो लोग बेहतर कार्य कर रहे हैं या बेहतर करने की इच्छा रखते हैं, उसके पास सहायता जल्दी पहुंचे। आयुक्तालय का मानना है कि डाटा अपडेट होता है, तो 3000 करोड़ की सब्सिडी 4-5 हजार करोड़ तक पहुंच सकती है।

गत वर्ष 2700 करोड़ की पावर सब्सिडी

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य सरकार ने टेक्सटाइल उद्योग को लगभग 2700 करोड़ रुपये की केवल बिजली सब्सिडी प्रदान की है। यह रकम बहुत बड़ी है। सरकार चाहती है कि राज्य में टेक्सटाइल सेक्टर फले-फूले और आगे बढ़े। अलग-अलग सेक्टर को प्रति यूनिट लगभग 4.77 रुपये बिजली में सब्सिडी मिलती है। पावरलूम एक बहुत बड़ा सेक्टर है, जो इससे लाभान्वित हो रहा है। मशीन आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने उद्योगों को लगभग 370 करोड़ रुपये का फैपिटल सब्सिडी भी दी है ताकि संचालक अपनी फैट्रियों को आधुनिक बना सकें और राज्य के लिए राजस्व और रोजगार सुजित कर सकें।

60,000 पावरलूम, 13 लाख रोजगार

आयुक्तालय के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 60,000 से अधिक पावरलूम कार्यरत हैं। इन पावरलूम में 2 से लेकर सैकड़ों तक श्रमिक कार्यरत है। लगभग 13 लाख लोगों को सीधे तौर घर रोजगार मिला हुआ है, लेकिन ये संगठित नहीं है।

उन्नत भी नहीं है। ये सामने नहीं आते है, जबकि इकोनॉमी में बड़ा योगदान है। सरकार का लक्ष्य इन्हें आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने का है। इसके आंकड़े जुटाने का काम राज्य सहित पूरे देश में चल रहा है।

स्पीड कम है, लेकिन जल्द ही इसे गति प्रदान की जाएगी ताकि सरकारी योजनाओं से इन्हें सीधे जोड़ा जा सके और बिचौलियों का खेल खत्म किया जा सके,

विदर्भ में कपास, टेक्सटाइल पार्क कहीं और

यह भी अजब इतेफाक है कि विदर्भ में कपास की भरपूर खेती होती है लेकिन जब टेक्सटाइल पार्क स्थापना की बात आती है, तो हम पिछड़ जाते हैं। राज्य में इस वक्त 12 टेक्सटाइल पार्क संचालित हो रहे हैं, जिनमें कोल्हापुर, बारामती, धुले, ठाणे में भी बहुतायत में हैं, विदर्भ में केवल हिंगणघाट में एक टेक्सटाइल पार्क संचालित हो रहा है। सरकार इसमें 40 फीसदी तक सब्सिडी देती है। इन पाकों में 42,000 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं, लेकिन विदर्भ में केवल 10,000 श्रमिक। इस परिस्थिति को बदलना होगा।

नियमों में हो रहा संशोधन पर विचार

दैने ने बताया कि टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने के कुछ नियमी में बदलाव का प्रस्ताव है। 2023-2028 के लिए जारी टेक्स्टाइल नीति को और व्यावहारिक बनाने की इच्छा खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जाहिर की है। वे व्यक्तिगत रुचि भी ले रहे है। जल्द ही इसमें आमूलचूल बदलाव देखने को मिलेगा, इसके बाद विदर्भ में और अधिक टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जा सकेंगे।

टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क नियम भी बदलेंगे

राज्य के प्रत्येक राजस्व मंडल में एक-एक टेक्सटाइल पार्क बनाने की योजना नीति के तहत थी, दो बार टेंडर निकाले गए, लेकिन लोगों ने रुचि नहीं दिखाई अब इस श्रेणी में भी आगे बढ़ने की मंशा राज्य सरकार की है और जल्द ही नियमों में बदलाव कर नीति को और पुख्ता बनाने की पहल होगी, कुछ कड़े और अनावस्यक प्रावधानों को हटाने पर गंभीरता से विचार हो रहा है।

-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से नीरज नंदन की रिपोर्ट

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