Maharashtra Local Body Election: नाशिक में महिलाओं को बराबर हक, मनपा में 61 सीटें आरक्षित

Nashik Municipal Corporation Election में प्रभागवार आरक्षण ड्रा से राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। 61 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित, कई दिग्गजों की सीटें बदलीं और नए चेहरों को मौका मिलने के आसार हैं।
नासिक महानगरपालिका चुनाव (pic credit; social media)
नासिक महानगरपालिका चुनाव (pic credit; social media)
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Nashik News In Hindi: मनपा चुनाव का एक महत्वपूर्ण चरण माने जाने वाले प्रभागवार आरक्षण की लॉटरी मंगलवार 11 नवंबर को सभी दलों के चुनाव इच्छुक उम्मीदवारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में कालिदास कलामंदिर में निकाली गई।

इस प्रक्रिया में कई वर्तमान नगरसेवकों के अवसर समाप्त हो गए हैं, और नए चेहरों को मौका मिलने के संकेत दिखाई देने लगे हैं। आयुक्त मनीषा खत्री और प्रशासन उपायुक्त लक्ष्मीकांत सातालकर की उपस्थिति में यह ड्रॉ लगभग डेढ़ घंटे तक चला।

सातालकर ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि कुल 122 सीटों में से 61 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं। शेष सीटें सामान्य वर्ग (पुरुष और महिला दोनों के लिए) के लिए खुली रखी गई हैं।

समीकरणों में बड़ा फेरबदल

आरक्षण ड्रॉ की घोषणा होने के बाद कई इच्छुक उम्मीदवार निराशा में सदन से बाहर चले गए। इस लॉटरी में कई मौजूदा और इच्छुक उम्मीदवारों की स्थिति प्रभावित हुई है। पूर्व महापौर रंजना भानसी का प्रभाग पुरुष वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है, जिससे उनकी सीधी उम्मीदवारी खतरे में आ गई है, हालांकि वे सामान्य सीट से चुनाव लड़ सकती है। प्रभाग 12 में प्रियंका घाटे की सीट पुरुष आरक्षित हो गई है, जिससे किशोर घाटे को मौका मिल सकता है। कांग्रेस के राहुल दिवे जहाँ से चुनकर आए थे, वह सीट अब अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है, जिससे उनके सामने अपने लिए नई सुरक्षित सीट तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है।

महिलाओं को मिला बराबर का हिस्सा

मनपा की 122 सीटों में से 61 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होने के कारण महिलाओं को बराबर का हिस्सा मिलेगा। इसके अलावा, चूंकि कुछ पुरुष सीटों पर भी महिलाएं चुनाव लड़ सकती है, इसलिए सदन में महिला प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

कुछ स्थानों पर तो वर्तमान और पूर्व नगरसेविकाएं आपस में एक दूसरे के सामने खड़ी होगी, मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, भाजपा के वर्तमान 66 नगरसेवकों और उसमें इच्छुक उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भाजपा को टिकट वितरण में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

विशेष रूप से पंचवटी में, वर्तमान और पूर्व विधायकों के समर्थकों के बीच उम्मीदवारी के लिए होड़ देखने को मिलेगी। आरक्षण ने कई दिग्गजों के क्षेत्रों को बदल दिया है, जिससे असंतुष्टों को संभालना मुश्किल होगा।

उम्मीदवारों के चयन में करनी पड़ेगी मशक्कत

अन्य दलों को कुछ स्थानों पर उम्मीदवारों की तलाश करनी पड़ेगी, जबकि कुछ सीटों पर उम्मीदवार मिलना मुश्किल होगा। महाविकास आघाड़ी (मविआ) के एक साथ चुनाव लड़ने की संभावना को देखते हुए, उन्हें भी पैनल के लिए उम्मीदवारों का चयन करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। यह गठबंधन, आरक्षित सीटों के साथ मिलकर, भाजपा के किले को भेदने की रणनीति बनाएगा।

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