

नासिक जिले के मालेगांव में संविधान बचाव कमिटी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले के पास सभा के बाद निकाली गई तिरंगा रैली को पुलिस ने संगमेश्वर पुल के पास रोका।
आसिफ शेख, मुस्तकीम डिग्निटी और शान-ए-हिंद ने केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर निशाना साधा।
बैरिकेडिंग से नाराज प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और कुछ ने बैरिकेडिंग पर चढ़ने की कोशिश की।
प्रांत अधिकारी, तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
Nashik Malegaon Protest Chief Election Commissioner: नासिक जिले के मालेगांव में संविधान बचाव कमिटी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया गया। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले के पास सभा के बाद निकाली गई तिरंगा रैली को पुलिस ने संगमेश्वर पुल के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
इससे नाराज प्रदर्शनकारियों ने सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। आसिफ शेख, मुस्तकीम डिग्निटी और शान-ए-हिंद ने अपने संबोधन में चुनाव प्रक्रिया, पुलिस कार्रवाई और रैली रोके जाने पर सवाल उठाए। बाद में अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
नासिक जिले के मालेगांव में संविधान बचाव कमिटी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मालेगांव में आंदोलन किया गया। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले के पास सभा आयोजित करने के बाद तिरंगा रैली निकाली गई। हालांकि, संगमेश्वर पुल के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रैली को रोक दिया। रैली महात्मा गांधी के पुतले तक जाने वाली थी। रैली रोके जाने से नाराज प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पर चढ़ने की कोशिश भी की। बाद में प्रांत अधिकारी, तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन समाप्त किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए मुस्तकीम डिग्निटी ने सवाल उठाया कि जब देशभर में लोग चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, तो वे पद पर क्यों बने हुए हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के माध्यम से आंदोलनों को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी मांगें राष्ट्रपति तक पहुंचाई गई हैं। मुस्तकीम डिग्निटी ने आंदोलन के दौरान भगत सिंह और टीपू सुल्तान से जुड़े नारों का भी उल्लेख किया तथा टीपू सुल्तान के ऐतिहासिक योगदान पर अपनी बात रखी।
आसिफ शेख ने आपातकाल जैसे हालात होने का दावा किया। इस्लाम पार्टी के प्रमुख आसिफ शेख ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने आपातकाल का दौर नहीं देखा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें आपातकाल जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वोट चोरी के मुद्दे पर वे कई बार पत्रकार परिषदों में सबूत पेश कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई।
समाजवादी पार्टी की अध्यक्ष एवं उपमहापौर शान-ए-हिंद ने कहा कि यह आंदोलन की शुरुआत है। उन्होंने आरोप लगाया कि तिरंगा रैली रोककर आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में इससे अधिक तीव्र आंदोलन किए जाएंगे। साथ ही, उन्होंने बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल पर विचार करने की अपील की।
आंदोलन के दौरान पुलिस ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले की ओर जाने वाले कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की थी। आंबेडकर पुल, किदवई रोड और पुराने बस स्टैंड के पास पुलिस बंदोबस्त के तहत रास्ते रोके गए थे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस दबाव बनाकर आंदोलन रोकने की कोशिश कर रही है। रैली को आगे जाने की अनुमति नहीं मिलने से नाराजगी देखी गई। अंततः अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
आंदोलन में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), कांग्रेस और सेवा दल के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए। आयोजकों ने राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी।