

Oxygen Shortage In Hospital Plants Closed: नासिक में मालेगांव शहर का 200 बेड का सामान्य रुग्णालय इन दिनों ऑक्सीजन की किल्लत से जूझ रहा है। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का लाखों रुपये का भुगतान बकाया होने के कारण सप्लाई में देरी होने की शिकायत सामने आ रही है।
अस्पताल में रोजाना 10 से अधिक ऑक्सीजन सिलिंडरों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में नियमित और पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
सामान्य रुग्णालय में हर महीने करीब 24 हजार मरीजों की ओपीडी में जांच, लगभग 300 आईसीयू और एनआईसीयू में लगातार मरीजों का इलाज होता है।
ऐसे महत्वपूर्ण अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। सरकार और ठेकेदार के बीच तालमेल का खामियाजा मरीजों को न भुगतना पड़े।
ऑक्सीजन सप्लायर का बकाया भुगतान करना सरकार की जिम्मेदारी है, जबकि मरीजों को समय पर पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध कराना ठेकेदार की जिम्मेदारी है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से ऑक्सीजन सप्लाई में देरी की शिकायतें सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन भी असहाय नजर आ रहा है।
यदि सरकार और ठेकेदार के बीच भुगतान एवं सप्लाई को लेकर तालमेल नहीं बैठा, तो इसका सीधा असर अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों पर पड़ सकता है। गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता जीवनरक्षक व्यवस्था है, इसलिए इस समस्या का तत्काल समाधान जरूरी है।
कोरोना काल के दौरान मालेगांव सामान्य रुग्णालय में 2 बड़े ऑक्सीजन टैंक और प्लांट लगाए गए थे। इनमें से एक प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया जाता था। वहीं तत्कालीन सांसद डॉ. सुभाष भामरे की विशेष पहल से लगाए गए दूसरे प्लांट में हवा से ऑक्सीजन तैयार करने की क्षमता थी।
बताया जा रहा है कि वर्तमान में दोनों ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़े हैं और अस्पताल परिसर में केवल खड़े नजर आते हैं। इन्हें दोबारा शुरू करने के लिए भी लाखों रुपये के खर्च की आवश्यकता बताई जा रही है। यदि इन प्लांटों को समय रहते शुरू किया जाता, तो बाहरी सप्लाई पर अस्पताल की निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती थी।
सामान्य रुग्णालय के वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. प्रल्हाद गुटे ने कहा कि अस्पताल में ऑक्सीजन की थोड़ी किल्लत महसूस हो रही है। इस संबंध में ठेकेदार से बातचीत चल रही है। समस्या की जानकारी सिविल सर्जन और डीडी मेडिकल के समक्ष भी रखी गई है। जल्द से जल्द समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता शफीक ने एंटीकरप्शन का आरोप लगाया कि अस्पताल में पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं है और अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों को मनपा तथा अन्य अस्पतालों से ऑक्सीजन सिलिंडर मांगने पड़ रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि ऑक्सीजन की समस्या के चलते मरीजों को धुले शहर में रेफर किए जाने की स्थिति भी सामने आ रही है। उन्होंने अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन कई महीनों से बंद होने का आरोप लगाते हुए कहा कि मरीजों को एक के बाद एक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इन समस्याओं की ओर ध्यान देने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है।
200 बेड के सामान्य अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज होता है। आईसीयू और एनआईसीयू जैसी संवेदनशील इकाइयों के चलते यहां ऑक्सीजन की निर्बाध उपलब्धता बेहद जरूरी है।
कोरोना काल में लगाए गए ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़े होने और मौजूदा सप्लाई में भी देरी की शिकायतों ने अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सवाल यह है कि मरीजों को राहत कब मिलेगी और बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट कब दोबारा शुरू किए जाएंगे?